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हाईकोर्ट।
– फोटो : amar ujala
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति और कार्यकारी परिषद के आदेश को रद्द करते हुए पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम के बर्खास्त छात्र (याची) को क्लास लेने और नियमित परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि छात्र अगर पूर्व की परीक्षा में शामिल नहीं हो कसा है, उसके लिए विशेष परीक्षा कराई जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय ने आदिल खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि कुलपति और कार्यकारी परिषद ने न्याय के प्राकृतिक सिद्धांतों का पालन नहीं किया। याची को बिना सुने ही उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर दी।
याची पर विश्वविद्यालय में हिंसा करने और एक कर्मचारी पर जान से मारने का प्रयास करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। उसके साथ कई और भी छात्र शामिल थे। मामले में उसके खिलाफ प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने कार्रवाई करते हुए उसे विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा कुलपति ने कार्रवाई करते हुए उसे बर्खास्त कर दिया था। कार्यकारी परिषद ने भी उस पर मुहर लगा दी थी।
इस वजह से वह परीक्षा से भी वंचित हो गया। याची की ओर से कोर्ट में कहा गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना के संबंध में उसका पक्ष सुना ही नहीं और एकतरफा कार्रवाई कर दी। कोर्ट ने इसे प्राकृतिक न्याय सिद्धांत के विपरीत माना और कुलपति और कार्यकारी परिषद के आदेश को रद्द करते हुए क्लास में उपस्थित होने और परीक्षा में शामिल होने का आदेश पारित किया। कोर्ट ने 48 घंटे में आदेश की जानकारी विश्वविद्यालय के कुलपति को मुहैया कराने को कहा है।
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