Himachal: कुल्लू के देवी-देवताओं की जमीन अपने नाम करने पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ट्रस्ट की याचिका खारिज

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Himachal High court's big decision on transfer of land of deities of Kullu to its name, petition rejected

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू के देवी-देवताओं की जमीन अपने नाम करने पर बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने देव शक्ति चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि यदि देवताओं की जमीन को गैर कानूनी ढंग से स्थानांतरित किया गया है तो उस स्थिति में सक्षम अदालत में दावा किया जा सकता है। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट के पास इस तरह के मामलों का निपटारा करने का क्षेत्राधिकार नहीं है। देव शक्ति चैरिटेबल ट्रस्ट ने याचिका के माध्यम से आरोप लगाया था कि कुल्लू के देवी-देवताओं की जमीन को पुजारियों और कारदारों ने अपने नाम कर लिया है।

अदालत को बताया गया था कि वर्ष 1948-49 में देवी-देवताओं के नाम कुल 90,744 बीघा जमीन थी। वर्ष 2011-12 में यह केवल 8,458 ही रह गई है। देवी-देवताओं की लगभग 84,000 बीघा जमीन को पुजारियों और कारदारों ने अपने नाम कर दिया है। याचिकाकर्ता ट्रस्ट ने यह भी आरोप लगाया था कि राज्य सरकार की ओर से देवी-देवताओं के लिए असमान वितरण किया जा रहा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपने निर्णय में कहा कि याचिकाकर्ता के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि देवी-देवताओं की जमीन को भूमि अधिनियम के तहत राज में निहित किया गया है और इसका सही उपयोग किया गया है। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि याचिका को खारिज करने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने देवी-देवताओं की जमीन को गलत तरीके से स्थानांतरित किया है। इसके लिए सक्षम वादी दावा कर सकता है।

हाईकोर्ट ने तथ्य छिपाकर लिए पेट्रोल पंप का आवंटन किया रद्द

हाईकोर्ट ने तथ्य छिपाकर हासिल किए पेट्रोल पंप आवंटन को रद्द कर दिया है। अदालत ने जमीन के मालिकाना संबंधी जानकारी छिपाने के लिए प्रतिवादियों पर 40 हजार की कॉस्ट लगाई है। अदालत ने कॉस्ट की यह राशि भारत पेट्रोलियम समेत तीन अन्य प्रतिवादियों को याचिकाकर्ता के पक्ष में देने के आदेश दिए। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने देवेश चंदेल की याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किए। देवेश ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन की ओर से गांव पट्टा तहसील अर्की में पेट्रोल पंप के आवंटन को चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया था कि प्रतिवादी ने पेट्रोल पंप खोलने के लिए दर्शाई जमीन के मालिकाना संबंधी जानकारी छिपाई है। अदालत को बताया कि 25 नवंबर, 2018 को भारत पेट्रोलियम ने पट्टा गांव में पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए आवेदन मांगे थे।

अन्य पिछड़ा वर्ग के पात्र आवेदनकर्ताओं में से लॉटरी के माध्यम से यह पेट्रोल पंप स्थापित किया जाना था। आवेदन की अंतिम तिथि 25 दिसम्बर 2018 रखी गई थी। याचिकाकर्ता और निजी प्रतिवादी ने बतौर ओबीसी वर्ग से ऑनलाइन आवेदन किया। लॉटरी में निजी प्रतिवादी का नाम निकला और उसे 21 सितंबर 2019 को पेट्रोल पंप स्थापित करने का आशय पत्र सौंपा गया। पेट्रोल पंप को पाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने की शिकायत करते हुए याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी को जारी आशय पत्र को रद्द करने की गुहार लगाई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि निजी प्रतिवादी ने जमीन के मालिकाना हक की बात छिपाई है। उसने जिस भूमि की जानकारी अपने आवेदन में दी थी वह संयुक्त मालिकों की भूमि थी। जबकि आवेदन में केवल एक ही मालिक की ओर से भूमि बेचने का अनुबंध लगाया गया था। इतना ही नहीं, प्रतिवादी ने दीवानी अदालत में भूमि से जुड़े विवाद के लंबित होने की जानकारी भी आवेदन में नहीं दी थी। अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलों से सहमति जताते हुए पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए जारी आशय पत्र को खारिज कर दिया।

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