Himachal High Court: शिंकुला सुरंग के निर्माण की बोलीदाता कंपनी के 15 करोड़ जब्त करने का निर्णय सही

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Himachal High Court: The decision to confiscate Rs 15 crore from the bidder company for the construction of Sh

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिंकुला सुरंग के निर्माण की बोलीदाता कंपनी के 15 करोड़ जब्त करने का निर्णय सही ठहराया है। मुख्य न्यायाधीश एम एस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने कंपनी की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि बोलीदाता कंपनी के कारण जनहित को नुकसान पहुंचा क्योंकि सामरिक महत्व की यह सुरंग परियोजना का कार्य समय पर शुरू हो सकता था। लाहौल-स्पीति जिले में बनने वाली शिंकुला सुरंग के निर्माण के लिए बीआरओ ने सुरंग परियोजना के लिए 23 फरवरी 2023 को निविदाएं आमंत्रित की थी। इस परियोजना के लिए औसत खर्च 1504 करोड़ आंका था। कोलकाता की मेसर्स एबीसीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड सहित 10 बोलीदाताओं ने निविदा में हिस्सा लिया। याचिकाकर्ता कंपनी ने 15.4 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भी बीआरओ को दी थी।

5 जून को तकनीकी बीड खोली गई, जिसमें याचिकाकर्ता कंपनी ने 1504 करोड़ की अनुमानित कीमत की सुरंग का निर्माण करने के लिए वित्तीय बीड 1569 रुपये भरी थी। 24 अगस्त को 7 सफल बोलीदाता की वित्तीय बीड खोली गई। याचिकाकर्ता कंपनी की बीड 1569 रुपये होने के कारण उसे न्यूनतम लागत में निर्माण करने वाली कंपनी पाते हुए एल वन घोषित कर दिया गया। 25 अगस्त को कंपनी ने बीआरओ को बताया कि उन्होंने लागत 1569 करोड़ दर्शाई थी न कि 1569 रुपये। 26 अगस्त को बीआरओ ने कंपनी को 1504 करोड़ की लागत वाली सुरंग को 1569 रुपये में बनाने की विस्तृत जानकारी 31 अगस्त तक देने को कहा।

30 अगस्त को कंपनी ने बताया कि यह गलती सिस्टम में खराबी के कारण हुई होगी। उसने अपनी बोली 1569 करोड़ रुपये आंकते हुए खुद को एल-5 घोषित करने की प्रार्थना की। कंपनी ने 15.4 करोड़ की धरोहर राशि जब्त न करने करने की गुहार भी लगाई। 16 सितंबर को बीआरओ ने कंपनी को डिफॉल्टर घोषित करते हुए उसकी धरोहर राशि जब्त करने के आदेश जारी कर दिए। अदालत ने मामले से जुड़ा रिकॉर्ड देखने के बाद कंपनी की गलती संबंधी दलील को नकारते हुए कहा कि यह गलती केवल प्रार्थी के साथ ही कैसे हो सकती है।

दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर बनने वाली होगी शिंकुला टनल

समुद्रतल से 16,580 फीट ऊंचे शिंकुला दर्रे को भेदकर बन रही 4.1 किलोमीटर लंबी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस टनल से पाक और चीन सीमा तक भारतीय सेना की पहुंच आसान होगी। इसके निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 1,700 करोड़ जारी कर दिए हैं। इस टनल से पाक और चीन सीमा तक भारतीय सेना की पहुंच आसान होगी। टनल बनने से मनाली-कारगिल और मनाली-लेह सामरिक मार्ग के बीच 12 महीने सेना के साथ आम लोगों और पर्यटक वाहनों की आवाजाही होगी। बर्फबारी में भी यातायात में कोई समस्या नहीं रहेगी। इस टनल के बनने से मनाली-लेह और मनाली-कारगिल के बीच करीब 100 किलोमीटर की दूरी कम होगी।

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