Himachal News: नाशपाती के दामों से बागवान उत्साहित, 110 रुपये किलो बिकी

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Himachal News : pear crop get bumper price 110 rupees per kg

बगीचे में नाशपाती की फसल।
– फोटो : संवाद

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प्लम के बाद अब नाशपाती का सीजन जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू हो गया है। सब्जी मंडियों में अर्ली वैरायटी की नाशपाती पहुंचनी शुरू हो गई है। कुल्लू के निचले क्षेत्रों में नाशपाती की किस्में तैयार हो गई हैं। बताया जा रहा है कि इस बार नाशपाती की पैदावार कम है। जिसके चलते मंडियों में नाशपाती की डिमांड अधिक है लेकिन मंडियों में आने वाली आपूर्ति कम है। ऐसे में बागवानों को नाशपाती के अच्छे दाम मिल रहे हैं।

बंदरोल सब्जी मंडी में सोमवार को नाशपाती 110 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बिकी है। उम्दा दाम मिलने से बागवानों में खुशी है। कई क्षेत्रों मे तो नाशपाती न के बराबर है। कुल्लू में अच्छी फसल होने पर करीब 1,600 टन नाशपाती का उत्पादन होता है। इस बार बहुत कम फसल से उत्पादन में भारी गिरावट होगी।

नाशपाती के उत्पादक प्रताप पठानिया, सुनू राम, अशोक ठाकुर, विजय पठानिया, महेश, गोपाल ठाकुर, देवराज नेगी ने कहा कि इस बार नाशपाती की फसल उनके बगीचों में न के बराबर है। नाशपाती की पैदावार कम होने से खासा नुकसान हो रहा है। ऐसे में बगीचों के खर्च भी पूरे नहीं होंगे। बंदरोल सब्जी मंडी के आढ़ती मोहन ठाकुर ने कहा कि सोमवार को नाशपाती के 110 रुपये प्रतिकिलो तक दाम मिले।

कुल्लू फलोत्पादक मंडल के प्रधान महेंद्र उपाध्याय ने कहा कि इस वर्ष नाशपाती की फसल बहुत कम है। कई बगीचों में तो पेड़ खाली ही नजर आ रहे हैं। इससे उत्पादकों की आर्थिकी को खासा नुकसान हो रहा है। कम उत्पादन से मजदूर से लेकर आढ़तियों, व्यापारियों और इससे जुडे तमाम वर्गों को क्षति हो रही है। बागवानी विभाग के उपनिदेशक बीएम चौहान ने बताया कि सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी होने से नाशपाती की फसल पर प्रतिकूल असर हुआ है। मौसम अनुकूल न रहने से सेटिंग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने से फसल कम है।

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