Himachal News: बेनतीजा रही बैठक, मंत्री जगत और हर्षवर्धन के सामने उलझे हाटी समुदाय के दो गुट

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Hati community meeting remained inconclusive, two groups clashed in front of ministers and Harsh Vardhan.

हाटी समुदाय के दो गुट उलझे।
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के ट्रांसगिरि क्षेत्र को दिए गए अनुसूचित जनजातीय दर्जे के मामले को लेकर शनिवार को राज्य सचिवालय में बुलाई गई बैठक में खूब हंगामा हुआ। बेनतीजा रही बैठक में जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के सामने हाटी समाज के दो गुट उलझ गए। एक गुट ने मुख्य सचिव कमेटी रूम से मुख्यमंत्री कार्यालय होते हुए नारेबाजी कर बैठक का बहिष्कार कर दिया। नारेबाजी करने वाले गुट ने हाटी समाज को एसटी का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से पारित कानून को प्रदेश सरकार पर लटकाने का आरोप लगाया।

इस पर दोनों मंत्रियों ने बताया कि इस मामले में केंद्र सरकार के स्पष्टीकरण का इंतजार है। उन्होंने कहा कि कुछ शरारती तत्वों ने बैठक का माहौल बिगाड़ा। शनिवार दोपहर बाद सचिवालय के मुख्य सचिव कमेटी रूम में काफी संख्या में हाटी समुदाय के लोग पहुंचे। मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान विशेष तौर पर मौजूद रहे। बैठक में प्रधान सचिव ओंकार शर्मा सहित कई अन्य अधिकारी भी शामिल हुए।

हाटी विकास मंच और केंद्रीय हाटी समिति ने प्रदेश सरकार से एसटी के दर्जे को जल्द प्रदेश में लागू करने के लिए कहा। मंत्री हर्षवर्धन ने बताया कि हाटी समाज के सभी प्रतिनिधियों को बैठक में बुलाया गया था। सार्थक चर्चा हो रही थी। हम इस नतीजे पर पहुंचे थे कि जब तक केंद्र सरकार से इस मामले में स्पष्टीकरण नहीं आता, तब तक एसटी का प्रोविजनल प्रमाणपत्र विद्यार्थियों को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से जारी अधिसूचना में लिखा है कि ट्रांसगिरि क्षेत्र के लोगों को एसटी का दर्जा दिया जाएगा।

प्रदेश के विधि विभाग ने जब इसकी पड़ताल की तो मालूम पड़ा कि पूर्व सरकार का प्रस्ताव कुछ और था। इसके चलते केंद्र से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस बाबत एक बार रिमाइंडर भी भेजा गया है। केंद्र से कोई जवाब नहीं आया है। उन्होंने कहा कि बैठक के लिए सांसद सुरेश कश्यप को भी बुलाया था। सांसद की अध्यक्षता में विधि मंत्री से मामला उठाने की बात हमने कही। इसी दौरान एससी वर्ग के कुछ लोगों ने जब अपनी बात रखी तो हाटी समाज के लोग भड़क उठे और इनमें कहासुनी हो गई। उधर, हंगामे को शांत करने के लिए दोनों कैबिनेट मंत्री और अफसर बेबस नजर आए।

इस मामले पर नहीं होनी चाहिए राजनीति

भाजपा और हाटी समुदाय को इस मामले को लेकर राजनीति नहीं करनी चाहिए। अधिसूचना में 1.60 लाख लोग हाटी समुदाय के दर्शाए हैं। एससी को जब प्रस्ताव में बाहर रखा गया था, तो अधिसूचना में क्यों शामिल किया गया। केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए। – हर्षवर्धन चौहान, उद्योग मंत्री

बैठक बेनतीजा रही, अब होगा ट्रांसगिरि में आंदोलन

बैठक पूरी तरह बेनतीजा रही। प्रदेश सरकार की मंशा केंद्रीय कानून को लटकाने और भटकाने की है। अब आंदोलन होगा। सरकार को सात दिन का समय दिया गया है। इसके बाद लोग सड़कों पर उतरेंगे। ट्रांसगिरि में आंदोलन किया जाएगा। – डॉ. रमेश सिंगटा, मुख्य प्रवक्ता, हाटी विकास मंच

प्रदेश सरकार दर्जा देने के लिए गंभीर नहीं

प्रदेश सरकार अनुसूचित जनजातीय कानून को लागू करने के प्रति गंभीर नहीं है। अब आंदोलन ही विकल्प है। बैठक में उन लोगों को भी बुलाया गया था, जो हितधारक हैं ही नहीं। इनकी वजह से बैठक में हंगामा हुआ। – डॉ अमी चंद कमल, अध्यक्ष, केंद्रीय हाटी समिति

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