Holika Dahan 2023 Timing LIVE Updates: होलिका दहन कल, जानें अपने शहर में होली जलने का सही मुहूर्त

[ad_1]

होलिका दहन के दिन न करें ये काम  

  • होलिका दहन की अग्नि को जलती चिता का प्रतीक माना गया है. इसलिए नए शादीशुदा जोड़ों को होलिका दहन को नहीं देखना चाहिए.  

  • माता-पिता के इकलौते संतान को कभी भी होलिका में आहुति नहीं देनी चाहिए. इसे अशुभ माना जाता है.

  • होलिका दहन के दिन सफेद खाद्य पदार्थ ग्रहण नहीं करना चाहिए.

  • होलिका दहन के समय सिर ढंककर ही पूजा करनी चाहिए.

  • सास-बहू को एक साथ मिलकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए.

  • इस दिन को भी शुभ या मांगलिक काम नहीं करना चाहिए.

  • होलिका दहन के दिन किसी भी व्यक्ति को उधार नहीं देना चाहिए. ऐसा करने से घर में बरकत नहीं होती है.

  • होलिका की अग्नि में पीपल, बरगद और आम की लकड़ी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
    होलिका दहन के दिन किसी महिला का अपमान नहीं करना चाहिए.

होलिका दहन 2023 की डेट

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 6 मार्च को शाम 4 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 7 मार्च को शाम 6 बजकर 10 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार होलिका दहन का त्योहार 7 मार्च को मनाया जाएगा.

होलिका दहन की कथा (Holika Dahan Story)

नारद पुराण के अनुसार आदिकाल में हिरण्यकश्यप नामक एक राक्षस हुआ था. दैत्यराज खुद को ईश्वर से भी बड़ा समझता था. वह चाहता था कि लोग केवल उसकी पूजा करें. लेकिन उसका खुद का पुत्र प्रह्लाद परम विष्णु भक्त था. भक्ति उसे उसकी मां से विरासत के रूप में मिली थी.
इसी बात को लेकर उन्होंने अपने पुत्र को भगवान की भक्ति से हटाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन भक्त प्रह्लाद प्रभु की भक्ति को नहीं छोड़ पाए. कई बार समझाने के बाद भी जब प्रह्लाद नहीं माना तो हिरण्यकश्यप ने अपने ही बेटे को जान से मारने का विचार किया. कई कोशिशों के बाद भी वह प्रह्लाद को जान से मारने में नाकाम रहा. बार बार मारने के प्रयास होने पर भी वह प्रभु-कृपा से बचता रहा. इसके बाद उसने अपनी बहन होलिका से मदद ली जिसे यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी. भगत प्रह्लााद को गोद में लेकर होलिका चिता पर बैठ गई. यह सबकुछ देखकर भी प्रह्लााद तनिक भी विचलित न हुए. पूरी श्रद्धा से वह भगवान विष्‍णु का नाम जपते रहे.
परन्तु होलिका का यह वरदान उस समय समाप्त हो गया जब उसने भगवान भक्त प्रह्लाद का वध करने का प्रयत्न किया. इस प्रकार प्रह्लाद को मारने के प्रयास में होलिका की मृत्यु हो गई. होलिका अग्नि में जल गई परन्तु नारायण भगवान की कृपा से प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ.

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

ज्योतिष के अनुसार इस बार होलिका दहन (Holika Dahan Shubh Muhurat 2023) का शुभ मुहूर्त सिर्फ 2 घंटे 27 मिनट का है. 7 मार्च 2023 की शाम करीब 6:24 बजे से होलिका दहन शुरू हो रहा है. वहीं इसी रात 8 बजकर 51 मिनट के बीच होलिका दहन के लिए बहुत ही शुभ होता है. इस शुभ मुहूर्त में होलिका पूजन किया जाएगा और उसके बाद होलिका में आग लगा दी जाएगी.

भद्रा काल में होलिका दहन होता है अशुभ!

पौराणिक कथाओं के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन को अशुभ माना जाता है. यह होलिका दहन का दोष है. माना जाता है कि भद्रा के स्वामी यमराज होने के कारण इस योग में कोई भी शुभ कार्य वर्जित होता है. होलिका दहन भद्रा पुंछ में किया जा सकता है. इस बार होलिका दहन 7 मार्च को शुभ है. जबकि अगले दिन (8 मार्च) को रंग वाली होली खेली जाएगी.

पूजन विधि

होलिका दहन की पूजा और उसमें अग्नि प्रज्जवलित हमेशा शुभ मुहूर्त में करना चाहिए. होलिका दहन की पूजा के लिए सबसे पहले पूर्व दिशा में मुंह करके होलिका को जल, रोली, अक्षत, फूल, पीली सरसों, गुलाल और मिष्‍ठान अर्पित करें. साथ ही नई फसल यानी कि गेहूं और चने की बालियां चढ़ाएं. इसके बाद होलिका की सात बार परिक्रमा करें.

ये है पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप को भगवान बनने का जुनून सवार हो गया था और वह चाहता था कि राज्य के सभी लोग उसे भगवान माने. प्रजा भयवश होलिका दहन पर्व धार्मिक से कहीं अधिक वैज्ञानिक है. सर्व विदित है कि बरसात के बाद दीपावली पर्व तक वातावरण में जहरीले कीटाणु व विषाणु की संख्या बढ़ जाती है. इन जहरीले कीटाणुओं व विषाणुओं का आग प्रिय है. इसलिए रात में प्रकाश जलने पर उसके करीब जाने वाले कुछ कीटाणु जल भी जाते हैं पर अधिकांश बच जाते हैं. वातावरण में इन बचे कीटाणुओं व विषाणुओं को नष्ट करने के लिए गांव-गांव होलिका दहन होता है.

होलिका दहन के दिन न करें ये काम  

  • होलिका दहन की अग्नि को जलती चिता का प्रतीक माना गया है. इसलिए नए शादीशुदा जोड़ों को होलिका दहन को नहीं देखना चाहिए.  

  • माता-पिता के इकलौते संतान को कभी भी होलिका में आहुति नहीं देनी चाहिए. इसे अशुभ माना जाता है.

  • होलिका दहन के दिन सफेद खाद्य पदार्थ ग्रहण नहीं करना चाहिए.

  • होलिका दहन के समय सिर ढंककर ही पूजा करनी चाहिए.

  • सास-बहू को एक साथ मिलकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए.
    इस दिन को भी शुभ या मांगलिक काम नहीं करना चाहिए.

  • होलिका दहन के दिन किसी भी व्यक्ति को उधार नहीं देना चाहिए. ऐसा करने से घर में बरकत नहीं होती है.

  • होलिका की अग्नि में पीपल, बरगद और आम की लकड़ी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

  • होलिका दहन के दिन किसी महिला का अपमान नहीं करना चाहिए.

होलिका दहन 2023 की डेट

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 6 मार्च को शाम 4 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 7 मार्च को शाम 6 बजकर 10 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार होलिका दहन का त्योहार 7 मार्च को मनाया जाए

होलिका दहन पर क्यों देखते हैं भद्रा काल

होली की कथा के अनुसार,मान्यता है कि भद्रा के स्वामी यमराज होने के कारण इस योग में कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है. वहीं, भद्रा पुंछ में होलिका दहन किया जा सकता है, क्योंकि इस समय भद्रा का प्रभाव काफी कम होता है और व्यक्ति को दोष भी नहीं लगता.

भद्रा काल समय

इस बार होलिका दहन 7 मार्च, मंगलवार को है.वहीं भद्रा काल का मुहूर्त 06 मार्च 2023 को सायं 04:48 मिनट से लगेगा और 7 मार्च 2023 को प्रातः 05:14 मिनट पर समाप्त हो जाएगा.तो इस हिसाब से पंचांग के अनुसार इस बार होलिका दहन पर भद्रा का साया नहीं है.

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *