HP High Court: एमबीयू फर्जी डिग्री मामला, दो को गैर जमानती वारंट जारी

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Himachal Pradesh High Court manav bharti university fake degree case News

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट।
– फोटो : अमर उजाला

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बहुचर्चित मानव भारती विश्वविद्यालय फर्जी डिग्री मामले में शिमला की विशेष अदालत ने दो गैर हाजिर आरोपियों को गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। विशेष न्यायाधीश भूपेश शर्मा ने नामित आरोपी प्रमोद कुमार और सारिका की ओर से दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया जिसके तहत अदालत में पेश होने से छूट दिए जाने की गुहार लगाई थी। अदालत ने दोनों आरोपियों के मुचलके को भी रद्द कर दिया है।

साथ ही दोनों आरोपियों के जमानत देने वाले के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 446 के तहत कार्यवाही चलाने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा अदालत ने दो आरोपी मंदीप राणा और अशोनी कंवर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने के लिए दायर आवेदन पर सुनवाई की। अदालत ने इस पर आदेश देने के लिए मामले की सुनवाई 2 सितंबर को निर्धारित की है। इस मामले में नामजद 16 में से 12 आरोपी अदालत के समक्ष पेश हुए।

प्रमोद कुमार और सारिका को अदालत ने 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दी थी। अदालत ने अब मुचलके की राशि को राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दिए हैं। मंदीप राणा और अशोनी कंवर अदालत के समक्ष शुरू से ही पेश नहीं हो रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने शिमला की विशेष अदालत के समक्ष आवेदन दायर कर कहा है कि मंदीप और अशोनी जानबूझ कर अदालत के ओर से जारी समन को नहीं ले रहे हैं। उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जाए।

योग्य सर्वेक्षक को बेलदार नियुक्त करने पर हाईकोर्ट तल्ख

हाईकोर्ट ने योग्य सर्वेक्षक को बेलदार नियुक्त करने के मामले में राज्य सरकार की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि राज्य को आदर्श नियोक्ता के रूप में शोषणकारी नीतियों का सहारा नहीं अपनाना चाहिए। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने कर्मचारी को सर्वेक्षक के पद का वेतन देने के दिए आदेश दिए हैं। अदालत ने लोक निर्माण विभाग की अपील को खारिज करते हुए ये निर्णय सुनाया।

लोक निर्माण विभाग ने एकलपीठ के निर्णय को खंडपीठ के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। एकलपीठ ने प्रतिवादी राकेश कुमार को सर्वेक्षक के पद पर नियमित करने और उसे सर्वेक्षक के पद का बकाया वेतन अदा करने का निर्णय दिया था। इस निर्णय को विभाग ने अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। खंडपीठ ने पाया कि प्रतिवादी राकेश कुमार ने श्रम प्राधिकरण के समक्ष दावा किया था कि वह योग्य सर्वेक्षक है जबकि उसे बेलदार के पद पर तैनाती दी थी।

इसके बाद विभाग ने प्रतिवादी से सर्वेक्षक का काम लिया और बेलदार के पद का ही वेतन अदा किया। श्रम प्राधिकरण ने मामले के जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन के बाद विभाग को आदेश दिए कि प्रतिवादी राकेश कुमार को सर्वेक्षक के पद पर नियमित किया जाए और उसे सर्वेक्षक के पद का बकाया वेतन अदा किया जाए।

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