हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व निदेशक डॉ. अजय कुमार गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। राज्य सतर्कता विभाग ने आरोपी को कोरोना काल के दौरान आवश्यक उपकरणों की खरीद-फरोख्त घोटाले में नामजद किया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने नामित आरोपी की जमानत खारिज करते हुए कहा कि आपातकाल जैसी स्थिति में भी आम जनता के जीवन से खिलवाड़ करने के संगीन जुर्म के आरोपी को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है।
अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है कि उसने कोरोना योद्धाओं के लिए मास्क, दस्ताने, थर्मल स्कैनर और पीपीई किट जैसे उपकरणों की खरीद-फरोख्त में हेराफेरी की है।
राज्य सतर्कता विभाग ने स्वास्थ्य विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. अजय कुमार गुप्ता और बलराम के बीच आपसी बातचीत के ऑडियो की जांच की थी। जांच में पाया गया कि आरोपी ने जीवन रक्षक मशीनें खरीदने के लिए 30 लाख रुपये राशि स्वीकृत की थी। इस राशि में उसने 85 हजार रुपये प्रति मशीन कमीशन तय की थी। राज्य सतर्कता विभाग ने आरोपी के खिलाफ रिश्वत लेने संबंधी पुख्ता सबूत जमा किये और आरोपी के खिलाफ 17 सितंबर 2022 को प्राथमिकी दर्ज की। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष दलील दी कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है।
अभियोजन पक्ष ने आरोपी को जमानत पर रिहा किए जाने का विरोध किया। दलील दी गई कि कोरोनामहामारी दौरान स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी को जीवन रक्षक मशीनों का लेन देन करते समय सजग रहना चाहिए था। लोगों की जान बचाने के लिए उचित कदम उठाने के बजाय वह अपने हित को सफल बनाने में लगा रहा। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड और अभियोजन पक्ष की स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चुराह तहसील के शक्ति वन बीट में देवदार के हरे पेड़ों को काटने पर मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने सचिव वन डीएफओ सलूणी और ठेकेदार झगड़ सिंह से जवाब तलब किया है। अदालत ने डीएफओ सलूणी को आदेश दिए कि वे मौके पर जाकर मामले की जांच करें और विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करें। मामले की सुनवाई 3 जनवरी 2023 को निर्धारित की गई है। पूर्व जिला परिषद सदस्य करमचंद ठाकुर ने जनहित में याचिका दायर की है। दलील दी गई कि याचिकाकर्ता की ओर से दायर इस याचिका में कोई निजी लाभ नहीं है और न ही किसी से द्वेष की भावना में यह याचिका दायर की गई है।
अदालत को बताया गया की सूखे पेड़ों को काटने की आड़ में ठेकेदार निजी हित के लिए हरे पेड़ों की बलि दे रहा है। आरोप लगाया गया कि ठेकेदार को वन निगम ने 25 से 30 सूखे पेड़ों को काटने की अनुमति प्रदान की थी, लेकिन मौके पर ठेकेदार ने 60 से अधिक हरे पेड़ों को काट दिया। इतना ही नहीं, सबूत मिटाने के लिए ठेकेदार ने हरे पेड़ों के ठूंठों को जला दिया। अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने इसकी शिकायत वन विभाग के अधिकारियों को की, लेकिन इस मामले में कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ये आदेश पारित किए।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व निदेशक डॉ. अजय कुमार गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। राज्य सतर्कता विभाग ने आरोपी को कोरोना काल के दौरान आवश्यक उपकरणों की खरीद-फरोख्त घोटाले में नामजद किया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने नामित आरोपी की जमानत खारिज करते हुए कहा कि आपातकाल जैसी स्थिति में भी आम जनता के जीवन से खिलवाड़ करने के संगीन जुर्म के आरोपी को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है।
अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है कि उसने कोरोना योद्धाओं के लिए मास्क, दस्ताने, थर्मल स्कैनर और पीपीई किट जैसे उपकरणों की खरीद-फरोख्त में हेराफेरी की है।
राज्य सतर्कता विभाग ने स्वास्थ्य विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. अजय कुमार गुप्ता और बलराम के बीच आपसी बातचीत के ऑडियो की जांच की थी। जांच में पाया गया कि आरोपी ने जीवन रक्षक मशीनें खरीदने के लिए 30 लाख रुपये राशि स्वीकृत की थी। इस राशि में उसने 85 हजार रुपये प्रति मशीन कमीशन तय की थी। राज्य सतर्कता विभाग ने आरोपी के खिलाफ रिश्वत लेने संबंधी पुख्ता सबूत जमा किये और आरोपी के खिलाफ 17 सितंबर 2022 को प्राथमिकी दर्ज की। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष दलील दी कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है।
अभियोजन पक्ष ने आरोपी को जमानत पर रिहा किए जाने का विरोध किया। दलील दी गई कि कोरोनामहामारी दौरान स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी को जीवन रक्षक मशीनों का लेन देन करते समय सजग रहना चाहिए था। लोगों की जान बचाने के लिए उचित कदम उठाने के बजाय वह अपने हित को सफल बनाने में लगा रहा। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड और अभियोजन पक्ष की स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।