HP High Court: बनाड़ और देशमोलिया देवताओं की भ्राशा प्रथा खत्म नहीं होगी

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Bhrasha tradition of Banar and Deshmoliya deities will not end

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने उपमंडलीय दंडाधिकारी के उस फैसले पर मुहर लगाई है, जिसमें फैसला दिया गया था कि जिला शिमला के बनाड़ और देशमोलिया देवताओं की भ्राशा प्रथा खत्म नहीं होगी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिमला (वन) ने भी इस निर्णय को उचित ठहराया था और इस पर मुहर लगाई थी। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने शमशेर काल्टा व अन्य की ओर से याचिका को खारिज कर दिया। प्रार्थी शमशेर काल्टा व अन्य ने उपमंडलीय दंडाधिकारी के फैसले को प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने प्रार्थियों की ओर से दायर याचिका को निराधार पाते हुए इसे खारिज कर दिया था। यह उल्लेखनीय है कि उपमंडलीय दंडाधिकारी रोहड़ू बीआर शर्मा ने इस मामले की सुनवाई करते हुए देवताओं की प्राचीन प्रथा भ्राशा को जारी रखने का धारा 147 सीआरपीसी के तहत फैसला सुनाया था। देवता क्रमवार साल-साल बाद सात गांवों का भ्रमण करते हैं। इन सात गांवों में बने मंदिरों में ही देवता की पूजा-अर्चना होती है। देवता बनाड़ और देशमोलिया की पुरातन प्रथा भ्राशा यानी रोटेशन में जाने की प्रथा अब समाप्त नहीं होगी। 

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