HP High Court: बीआरसीसी स्कूलों में देंगे सेवाएं, ऊना बॉटलिंग प्लांट परिसर खाली न करने पर चलेगा अवमानना मामला

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HP High Court: BRCC will provide services in schools, contempt case will go on for not vacating Una bottling p

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट।
– फोटो : अमर उजाला

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 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बीआरसीसी शिक्षकों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसके तहत 198 बीआरसीसी शिक्षकों को स्कूलों में तैनात किए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी। अदालत ने 13 जून 2023 को प्रदेश सरकार के इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया। याचिकाकर्ता मायाराम शर्मा व अन्य ने सरकार के उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके तहत 198 बीआरसीसी शिक्षकों को स्कूलों में तैनात किया गया था।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत 6 वर्ष से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को जरूरी शिक्षा मुहैया करवाने के उद्देश्य से इस नीति के अंतर्गत उन्हें तैनात किया गया है। उन्हें बीआरआरसीसी नीति के अनुसार काफी राशि का व्यय व प्रशिक्षण के लिए समय का उपयोग करने के बाद तैनात किया गया था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार राज्य सरकार ने शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए 5 जुलाई 2023 को उन्हें फिर से स्कूलों में वापस भेजने के आदेश पारित कर दिए।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्तमान में सभी जिलों में लगभग 3889 पद जेबीटी और 597 पद मुख्य अध्यापक के खाली पड़े हैं। टीजीटी कला के 691, नॉन मेडिकल के 689 और मेडिकल के 371 पद रिक्त हैं । रिक्त पदों के कारण बच्चों की शिक्षा पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि बीआरसीसी को दोबारा से स्कूलों में भेजने का निर्णय गैरकानूनी नहीं है। अदालत ने राज्य सरकार की दलीलों से सहमति जताते हुए 55 शिक्षकों की याचिकाएं खारिज कर दी।

ऊना बॉटलिंग प्लांट परिसर को खाली नहीं करने पर चलेगा अवमानना मामला

प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों की अनुपालना न किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने द न्यू हिमाचल हैवी मीडियम एंड लाइट गुड्स ट्रक सोसायटी ऊना के प्रधान अविनाश मेनन को प्रथम दृष्टया अवमानना का दोषी पाया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश विरेंदर सिंह की खंडपीठ ने आरोप तय करने के लिए अविनाश मेनन को तलब किया है। मामले की सुनवाई 7 अगस्त निर्धारित की गई है।

अदालत ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के ऊना बॉटलिंग प्लांट परिसर को 30 अप्रैल तक खाली करने के आदेश दिए थे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि परिसर को खाली न करने पर हिमाचल हैवी मीडियम सहकारिता सोसायटी के सदस्यों के खिलाफ अवमानना जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिए थे।

अदालत ने सोसायटी को आदेश दिए थे कि वह 1 मई से नए ट्रांसपोर्टरों के ट्रकों की बॉटलिंग प्लांट में आवाजाही में किसी प्रकार की कोई बाधा उत्पन्न न करे। सोसायटी को आदेश दिए गए थे कि वह ग्राहकों से एकत्रित किए खाली सिलेंडरों को भी शांतिपूर्वक तरीके से कंपनी को सौंपे। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन कंपनी के बॉटलिंग प्लांट ऊना से गैस सिलेंडर ले जाने और खाली सिलेंडर वापस लाने का 30 अप्रैल तक की अवधि का ठेका उक्त सोसायटी को दिया था।

कंपनी ने याचिका दायर कर अदालत से गुहार लगाई थी कि सोसायटी को 1 मई से परिसर खाली करने के आदेश दिए जाए। कंपनी ने फिर से गैस सिलेंडर की ढुलाई के लिए नए सिरे से निविदाएं आमंत्रित की है। अदालत ने सोसायटी को नई निविदा प्रक्रिया में भाग लेने स्वतंत्रता भी दी थी। 27 अप्रैल को पारित इन आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए कंपनी ने आवेदन दायर कर कहा कि सोसायटी ने अदालत के आदेशों को न मानते हुए कंपनी परिसर में कानून व्यवस्था को खतरे में डाल दिया है।

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