IAS-IPS के नाम पर ऐंठे रुपये: अधिकारियों के नाम से अकाउंट बनाकर करते थे जालसाजी, 2000 लोगों को बना चुके शिकार

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Two thugs arrested for defrauding money in name of IAS and IPS in Delhi

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : फाइल फोटो

विस्तार


दक्षिण जिले की साइबर थाना पुलिस ने जालसाजी करने वाले दो आरोपियों प्रतापगढ़, यूपी निवासी रवि सिंह उर्फ आशीष और श्याम कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी आईडी से सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाकर पर खुद को आईपीएस, आईएएस और आईआरएस अधिकारी बताते थे और बच्चों की सहायता के नाम पर लोगों से डोनेशन के नाम पर एकम ऐंठ रहे थे। फिलहाल ये खुद को दक्षिण जिले के पुलिस उपायुक्त बता रहे थे। ये 2000 से ज्यादा लोगों से 50 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी कर चुके हैं। दोनों आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोन में आईएएस, आईपीएस और आईआरएस अधिकारियों के आधा दर्जन से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट पाए गए हैं।

दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त चंदन चौधरी ने बताया कि साइबर थाने में तैनात एसआई संदीप सैनी को सोशल मीडिया विश्लेषण के दौरान पता लगा कि दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त ऐश्वर्या शर्मा, आईपीएस 2017/एजीएमयूटी कैडर/बी.टेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एनआईटी भोपाल/भारत सरकार, के नाम से डिस्प्ले तस्वीर वाला एक ट्विटर अकाउंट खोला गया है। उपरोक्त अकाउंट एक आईपीएस अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है और ये एक बैंक खाते में बच्चों/मरीजों की मदद करने के बहाने पैसे मांग रहा है। मामला दर्जकर साइबर थाना प्रभारी अरुण कुमार वर्मा की देखरेख में इंस्पेक्टर हंसा राम, एसआई संदीप सैनी व एचसी अनिल की टीम ने जांच शुरू की। 

पुलिस टीम ने उस बैंक खाते की जांच की जिसमें पैसा गया था। फेसबुक से भी डिटेल खंगाली गई। इंस्पेक्टर हंसाराम व एसआई संदीप सैनी की टीम ने जांच के बाद अतरसंड, थाना-कोहंडौर, तह-पट्टी, जिला-प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश निवासी रवि सिंह उर्फ आशीष(22) और श्याम कुमार (23) को प्रतापगढ़, यूपी से दोनों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से पांच मोबाइल फोन, तीन डेबिट/क्रेडिट कार्ड, बैंक स्टेटमेंट और चेक बुक बरामद की गईं।

आरोपी रवि सिंह उर्फ आशीष ने खुलासा किया कि वह आईपीएस, आईएएस और आईआरएस अधिकारियों के फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, जीमेल, लिंक्डइन, केओओ, थ्रेड्स आदि पर उनकी तस्वीरों व नामों का उपयोग करके फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाता था। उन्होंने आगे खुलासा किया कि वह फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट पर बच्चों की मदद के बहाने दान करने के लिए क्यूआर कोड के साथ मरीजों की तस्वीरें पोस्ट करते थे। ये 2000 लोगों से पैसे ले चुके हैं। बच्चों व मरीज के नाम पर लोगों से 11 रुपये से लेकर 21 हजार रुपये तक इनको दान किए हैं। पुलिस उसे पहले भी इसी तरह के मामलों में दिल्ली और यूपी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, उसके पास से बरामद मोबाइल फोन में आईएएस, आईपीएस और आईआरएस अधिकारियों के कुल 8 फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट पाए गए।

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