[ad_1]

आईआईटी बीएचयू में बवाल का मामला
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीएचयू में दीवार बनाने पर तमाम दिग्गजों ने प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि दिल की सुनें। दीवार से काम नहीं चलेगा। सुरक्षा घेरा मजबूत बनाना होगा। महामना मदन मोहन मालवीय ने इस बगिया को अच्छी सोच के साथ सींचा था। बंटवारा से काम नहीं चलेगा।
बीएचयू जैसी संस्था में परिसर के भीतर दीवार बनवाने जैसे फैसले का कोई औचित्य समझ नहीं आता है। मेरे कुलपति के कार्यकाल में भी बात उठी थी। कैंपस में सुरक्षा का विकल्प दीवार चलाना थोड़े है। इसके लिए और भी कई ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। -प्रो. पंजाब सिंह, पूर्व कुलपति, बीएचयू
आईआईटी बीएचयू परिसर में बैरीकेडिंग, नाइट पेट्रोलिंग करने, समय-समय पर परिसर में अभियान चलाकर बाहरियों से पूछताछ करने जैसी कार्रवाई करने की जरूरत है। -प्रो. बीएन राय, पूर्व छात्र अधिष्ठाता, आईआईटी बीएचयू
महामना मालवीय जी ने एक परिवार की तरह विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। आईआईटी को पहले ही अलग कर गलत किया गया। दीवार चलवाकर घटनाएं रुक जाएंगी क्या। सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करना चाहिए। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों की संख्या लंबी है, लेकिन कुछ होता ही नहीं है। – अनिल श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष, बीएचयू छात्रसंघ
यह महामना की आत्मा पर दीवार बनवाने जैसा होगा। आईआईटी जब बीएचयू का हिस्सा नहीं रहा तो इसके लिए मिले दान की भूमि पर उसका कोई अधिकार भी नहीं है। यहां दीवार किसी कीमत पर नहीं बनने दी जाएगी। -डॉ. अरविंद कुमार शुक्ल, पूर्व उपाध्यक्ष, बीएचयू छात्रसंघपूर्व में
[ad_2]
Source link