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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : ANI
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सिंधु-गंगा नदी की तलहटी में बने मकानों में बायोमास (कोयला, लकड़ी आदि) का अंधाधुंध उपयोग लोग कर रहे हैं। इससे ही ठंड में दिल्ली में रात का प्रदूषण बढ़ जाता है और धुंध रहती है। यह खुलासा आईआईटी कानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी ने अपने शोध में किया है। इस शोध को नेचर जियो साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
दिल्ली में ठंड के दौरान रात को धुंध छाई रहती है। धुंध का कारण खोजने के लिए प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी और उनकी टीम ने शोध शुरू किया था। प्रो. त्रिपाठी की अगुवाई में हुए इस शोध में दो विदेशी संस्थाएं भी शामिल हैं। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), आईआईटी दिल्ली, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), स्विट्जरलैंड का पॉल शेरर इंस्टीट्यूट (पीएसआई) और फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इसमें सहयोग किया है।
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