[ad_1]

इस तस्वीर को भाजपा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कांग्रेस पर निशाना साधा।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सोशल मीडिया पर आज इमरजेंसी शब्द ट्रेंड कर रही है। भाजपा समेत कई लोग यह लिख रहे हैं कि “भूले तो नहीं! आपातकाल का वो काला दौर। जब कांग्रेस के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को कुचल दिया गया।” इतना ही नहीं बिहार भाजपा ने पोस्ट किया है, “1975 में आज ही के दिन कांग्रेस ने सत्ता के स्वार्थ व अंहकार में देश पर आपातकाल थोपकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की हत्या कर दी। असंख्य सत्याग्रहियों को रातों-रात जेल की कालकोठरी में कैदकर प्रेस पर ताले जड़ दिए।” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ट्वीट किया कि 25 जून 1975 को एक परिवार ने अपने तानाशाही प्रवृत्ति के कारण देश के महान लोकतंत्र की हत्या कर आपातकाल जैसा कलंक थोपा था। जिसकी निर्दयता ने सैकड़ों वर्षों के विदेशी शासन के अत्याचार को भी पीछे छोड़ दिया। ऐसे कठिन समय में असीम यातनाएं सहकर लोकतंत्र की स्थापना के लिए संघर्ष करने वाले सभी राष्ट्र भक्तों को नमन करता हूं। लगातार हो रहे पोस्ट पढ़ते-पढ़ते एक और पोस्ट पर नजरें ठहर गई। यह पोस्ट थी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की। हालांकि, यह पोस्ट उन्होंने दो दिन पहले लिखी थी लेकिन इसकी चर्चा आज ज्यादा हो रही है…
चंपारण से सत्य का आग्रह सभी दिशाओं में फैलेगा
सीएम नीतीश कुमार ने लिखा कि जेपी के चेले इतिहास को दोहरा रहे हैं। लोकतंत्र की जननी वैशाली अंगड़ाई ले रही है, मगध कमर कस कर पूर्वज अशोक के देश को बचाने के लिए तैयार है। अंगपुत्र कर्ण का तेज देश को राह दिखायेगा। चंपारण से सत्य का आग्रह सभी दिशाओं में फैलेगा। लोकनायक देख रहे होंगे कि उनके कई अनुयायी उनकी भूमि पर आकर उन्हें याद कर रहे हैं। कोई बुद्ध की जन्मभूमि से ज्ञान भूमि तक आए हैं तो कोई पेरियार की सामाजिक न्याय की संघर्ष का संदेश लेकर आए हैं। उनकी मुंहबोली भतीजी इंदु के नाती भी हस्तिनापुर से आए हैं, पंजाब की पावन भूमि के सरदार गुरु गोविंद के घर पहुंचे हैं। पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक हर दिशाओं से भारत भूमि के प्रबुद्धजन पहुंचे हैं। सबका इरादा एक है, “देश बचाना है।”
[ad_2]
Source link