केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह – फोटो : अमर उजाला
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कश्मीर घाटी में लक्षित हत्याओं के बाद से जम्मू संभाग में प्रदर्शन कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मियों के मामले को केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संवेदनशीलता से देखने की वकालत की है। कठुआ पहुंचे डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भी जान की कोई कीमत नहीं हो सकती। एक जान बचाने के लिए अगर दर्जन भर दफ्तर बंद करने पड़ें तो जान बचाना सबसे ज्यादा जरूरी है।
डॉ. सिंह का यह बयान तब आया है, जब तीन दिन पहले ही उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने दो टूक कहा था कि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को 31 अगस्त तक का वेतन दिया गया है, लेकिन यह नहीं हो सकता है कि उन्हें बिना काम के और वेतन दिया जाए। उल्लेखनीय है कि उप राज्यपाल के इस बयान पर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए थे। कश्मीरी पंडितों ने भी विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए, जिन्हें समझाने गए भाजपा नेताओं को भी प्रदर्शनकारी कश्मीरी पंडित कर्मियों का गुस्सा झेलना पड़ा था।
क्या कहा था उप राज्यपाल ने?
एलजी ने कहा था, कश्मीरी पंडित कर्मियों की जायज समस्याएं और मुद्दे रहे हैं, जिन्हें एक-एक कर सुलझाया जा रहा है। कश्मीर घाटी में सुरक्षित स्थानों पर तैनाती सुनिश्चित कर दी गई है। किसी भी कर्मचारी की अकेले तैनाती नहीं है। कम से कम दो या तीन कर्मचारी तैनात किए गए हैं। 2015 से नियुक्त कर्मचारियों के पदोन्नति के सभी मामलों का निपटारा किया जा रहा है। पहले भूमि तक नहीं मिलती थी, लेकिन अब आवास की समस्या को भी पूरी तरह से दूर किया जा रहा है।
इसके बाद उन्होंने कहा था कि कश्मीरी पंडित कर्मियों से सरकार की पूरी सहानुभूति है, लेकिन वह साफ शब्दों में कहना चाहते हैं कि बिना काम के अब और वेतन संभव नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि इस बाबत गुंजाइश तलाशने के लिए कमेटी विचार कर रही है। इसके लिए नीति भी बनाई जा सकती है।
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कश्मीर घाटी में लक्षित हत्याओं के बाद से जम्मू संभाग में प्रदर्शन कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मियों के मामले को केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संवेदनशीलता से देखने की वकालत की है। कठुआ पहुंचे डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भी जान की कोई कीमत नहीं हो सकती। एक जान बचाने के लिए अगर दर्जन भर दफ्तर बंद करने पड़ें तो जान बचाना सबसे ज्यादा जरूरी है।
डॉ. सिंह का यह बयान तब आया है, जब तीन दिन पहले ही उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने दो टूक कहा था कि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को 31 अगस्त तक का वेतन दिया गया है, लेकिन यह नहीं हो सकता है कि उन्हें बिना काम के और वेतन दिया जाए। उल्लेखनीय है कि उप राज्यपाल के इस बयान पर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए थे। कश्मीरी पंडितों ने भी विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए, जिन्हें समझाने गए भाजपा नेताओं को भी प्रदर्शनकारी कश्मीरी पंडित कर्मियों का गुस्सा झेलना पड़ा था।