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जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षाबल
– फोटो : अमर उजाला
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पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों ने जम्मू संभाग में आतंकी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। खासकर आईईडी से हमले की लगातार साजिशें बढ़ रही हैं। पिछले साल की तुलना में जम्मू संभाग में 3 गुना अधिक आईईडी हमलों की कोशिश हुई।
1990 के दशक में आतंकवाद चरम पर था
खासकर उन इलाकों को टारगेट करने की कोशिश की जा रही है, जहां 1990 के दशक में आतंकवाद चरम पर था और अब ये इलाके शांत हैं। जानकारी के अनुसार इस साल जम्मू संभाग में उधमुर में 3 आईईडी हमले, कटड़ा में एक, रामबन में 5 आईईडी हमले एवं करने का प्रयास, राजोरी में 5, पुंछ में 6, जम्मू जिले में 14, कठुआ जिले में 6, सांबा जिले में 4, डोडा जिल में 2, किश्तवाड़ में 2, रियासी जिले में 2 आतंकी साजिशें व हमले हो चुके हैं।
60 से ज्यादा मामले सामने आ चुके
इस साल अब तक जम्मू संभाग के सभी जिलों में आईईडी से हमले करने या फिर आतंकियों के लिए हथियार पहुंचाने के 60 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में तीन गुणा ज्यादा है। जम्मू संभाग में आंतरिक इलाकों से लेकर सरहद तक सीमा पार से बड़े स्तर पर आईईडी भेजकर या लगाकर हमले के प्रयास लगातार हो रहे हैं।
आईईडी से हमला आसान तरीका
पूर्व डीजीपी एसपी वैद कहते हैं कि आतंकी पहले सीमा पार से आते थे। फिदायीन हमला करते थे और खुद भी मर जाते थे। अब आतंकी संगठन अलग नीति पर काम कर रहे हैं। वह आईईडी लगाकर हमले कर रहे हैं, ताकि उनके किसी आतंकी की जान न जाए।
इसका भी एक कारण यह है कि आतंकी संगठनों के पास अब इतने आतंकी नहीं हैं और न ही हमले की योजना बनाने वाले आतंकी कमांडर। इसलिए वह लोग ऐसे लोगों से संपर्क करते हैं, जो आईईडी लगाकर हमला कर दे।
सटीक जानकारी से बच रहे
बेशक सीमा पार से साजिशें तेज की गई हैं, लेकिन खुफिया एजेंसियों की सटीक जानकारी और पुलिस एवं अन्य एजेंसियों की तत्काल कार्रवाई से साजिशों को नाकाम भी किया गया है। पुलिस और अन्य एजेंसियों ने मिलकर इस साल अब तक पूरे जम्मू संभाग में करीब 40 आईईडी बरामद की हैं, जिससे बड़े हमलों को टाला गया है।
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