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जम्मू में गर्मी बढ़ने के साथ पानी की समस्या होने लगी है।
– फोटो : अमर उजाला
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जम्मू में अब गर्मी बढ़ रही है, जो अगले माह अपने तेवर दिखाएगी। इसी बीच लंबे बिजली कट लगने का क्रम भी शुरू हो जाएगा। पानी की किल्लत पहले से चल रही है, ऊपर से पाइप परियोजना में घपले की बदबू आने लगी है। ऐसे में बिजली ठप होने से समस्या और ज्यादा गहराएगी।
लोगों का जहां तपिश के कारण पसीना निकलेगा, वहीं पानी की कमी से कंठ सूखेंगे और विरोध उबाल भरेगा। जलशक्ति विभाग के साथ-साथ बिजली निगम अपने ही दावों पर घिरेंगे। जम्मू संभाग में बिजली की मौजूदा स्थिति ऐसी है कि 1200 मेगावाट की खपत हो रही है।
शहर को दो ग्रिडों से बिजली आपूर्ति होती है। ग्लाडनी ग्रिड नरवाल और वर्न की 220-220 केवी क्षमता है। इस पर 12 फीडर निर्भर हैं। विभाग कहता है कि 10 करोड़ रुपये से मरम्मत करवाई जाएगी। इसमें पुराने पोल और ट्रांसफार्मर समेत अन्य काम होंगे।
मगर हकीकत यह है कि हर बार मई व जून में पानी की कमी के साथ बिजली कटौती से लोग परेशान होते हैं। अगले दो माह में बिजली की मांग 1500 मेगावाट हो जाएगी, जिस कारण दिन में चार से आठ घंटे कट लगेगा और जलशक्ति विभाग की मोटरें शोपीस बन जाएंगी।
देरी से चलती है मोटर
20 से 22 घंटे मोटर चले तो शहर में 2.50 लाख गैलन पानी की आपूर्ति होगी। चार से आठ घंटे तक बिजली जाने पर मोटर चलाने और पानी की आपूर्ति शुरू होने में दो घंटे का अतिरिक्त समय लगेगा, जिससे टैंकों में पानी कम स्टोर होगा। इस स्थिति में पानी के लिए हाहाकार मचेगा।
निजी टैंकर घर का बजट हिलाएंगे। बिजली विभाग के अनुसार ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। पहले की अपेक्षा सुधार आया है। 1200 मेगावाट से ऊपर लोड होने पर ढांचा हांफ जाता है। ट्रांसफार्मर जल जाते हैं। इन्हें बदलने में दस घंटे लगते हैं।
बिजली कट के कारण मोटर नहीं चलती। ऐसे में पानी स्टोर नहीं हो पाता। तकनीकी समस्या का हल बिजली निगम को करना है। – अनिल गुप्ता, एक्सईएन, जलशक्ति विभाग
कोशिश है-कम बिजली कट लगें। तकनीकी खामियों को दूर किया जाएगा। – राजेश शर्मा, एक्सईएन, बिजली कारपोरेशन
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