J&K High Court: 91 करोड़ के बैंक घोटाले में ठीक से जांच नहीं की, सीबीआई आगे करे जांच, जानें क्या है मामला

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jammu kashmir High Court: Investigation not done properly in Rs 91 crore bank scam

चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
– फोटो : file photo

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बहुप्रचारित 91 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में प्रधान सत्र न्यायाधीश जम्मू संजय परिहार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को न सिर्फ चालान लौटा दिया बल्कि जांच पर गंभीर टिप्पणी व प्रश्न खड़े करते हुए आगे की जांच करने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश ने सीबीआई विशेष कार्य शाखा (बैंकिंग-धोखाधड़ी क्षेत्र) सीबीआई मुख्यालय नई दिल्ली को ये निर्देश दिया है।

यह महत्वपूर्ण आदेश झेलम इंडस्ट्री, झेलम इंफ्रा प्रोजेक्ट इंडिया प्रा. लिमिटेड और न्यू जम्मू फ्लोर मिल्स आरसी के खिलाफ आरोप-पत्रों की सुनवाई के दौरान दिया। उपरोक्त एफआईआर आरोपियों के ऋण खातों में कथित अवैध लेनदेन व उनके द्वारा अन्य रूप से धन हस्तांतरित करने के आरोप में दर्ज की गई थी। 

मामले की सुनवाई के बाद प्रधान सत्र न्यायाधीश जम्मू संजय परिहार ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जांच अच्छे से नहीं की गई है, क्योंकि जांच अधिकारी ने सच्चाई का पता लगाने के लिए गहराई से जांच नहीं की। 

अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि आरोपी कंपनियों के पक्ष में नकद ऋण सुविधा बढ़ाने के लिए शिकायतकर्ता बैंक को प्रेरित करने के लिए झूठे दस्तावेज बनाकर धोखाधड़ी व जालसाजी की गई, जबकि हस्तलेखन विशेषज्ञ द्वारा दी गई फोरेंसिक रिपोर्ट नकारात्मक है। क्योंकि मूल रिकॉर्ड जिससे रिकॉर्ड में हेराफेरी के साक्ष्य जुटाए जा सकते थे उस प्राथमिक साक्ष्य को जब्त नहीं किया गया और न ही जांच अधिकारी द्वारा इसे ट्रैक करने का प्रयास किया गया। 

एक तरफ सीबीआई आरोप लगा रही है कि उसने आगे की जांच के मुद्दे को खुला रखा है, लेकिन साथ ही उसने बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं की है। ऐसा प्रतीत होता है कि जांच दिशाहीन तरीके से की गई है और जांच अधिकारी को इतना निष्पक्ष और जागरूक होना चाहिए था कि साक्ष्य गढ़ने की किसी भी संभावना को खारिज किया जा सके। 

उस पृष्ठभूमि में कोर्ट ने तीनों मामलों में आगे की जांच के आदेश दिए। कानून के अनुसार कार्यवाही करने के लिए आरोपपत्र सीबीआई विशेष कार्य शाखा (बैंकिंग-धोखाधड़ी क्षेत्र) सीबीआई मुख्यालय नई दिल्ली को वापस कर दिया। जेएनएफ

यह है मामला

उपरोक्त तीन मामलों की पृष्ठभूमि यह है कि आरोपी राज कुमार गुप्ता, जो कथित तौर पर उपरोक्त सभी तीन कंपनियों के प्रमोटर थे। एक समय में उनके पंजाब एंड सिंध बैंक में व्यापारिक खाते थे और वर्ष 2013 में उनके बीच आपसी आदान-प्रदान हुआ था। 

वह और बैंक ऑफ इंडिया (शिकायतकर्ता) के प्रतिनिधि झेलम इंडस्ट्रीज के संबंध में आरोपी पंजाब एंड सिंध बैंक से 25 करोड़ रुपये की नकद क्रेडिट सीमा का लाभ उठा रहे थे। जिस खाते को शिकायतकर्ता बैंक ने बढ़ी हुई सीमा के साथ अपने कब्जे में ले लिया था। 

शिकायतकर्ता बैंक ने 32.50 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा स्वीकृत की जिसकी बाद में समीक्षा की गई। इसी प्रकार झेलम इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड के प्रमोटर द्वारा 35 करोड़ रुपये से लेकर 50 करोड़ रुपये तक की अधिकतम सीमा का भी लाभ उठाया गया। न्यू जम्मू फ्लोर मिल्स के संबंध में कंपनी पंजाब एंड सिंध बैंक से नकद ऋण सुविधा का लाभ उठा रही थी।

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