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सवाल: आप कई दिन से यहां का दौरा कर रहे हैं। आखिर इस समस्या की जड़ कहां है?
जवाब: यहां एक वाटर सोर्स है, जिससे लगातार मॉश्चर (नमी) आ रही है। यहां टीम आई हुई है, एनआईटी, एनआईएच, आईआईटी, वाडिया से विशेषज्ञ आए हुए हैं। इसका कारण तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।
सवाल: लेकिन जब तक ये टीम पानी के रिसाव का मूल स्रोत नहीं ढूंढ पाएगी, तब तक क्या होगा?
जवाब: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच) की जो टीम आई है, उनके पास अत्याधुनिक उपकरण हैं, जिससे जल्द पता चल जाएगा कि ये रिसाव कहां से हो रहा है।
सवाल: इसमें कितना समय लग जाएगा।
जवाब: सर्वे चल रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही नतीजा मिलेगा।
सवाल: क्या यह सर्वे सिर्फ दरारों की गिनती का है?
जवाब: नहीं, यह मल्टी आस्पेक्ट का सर्वे है, जिसमें दरारों से जुड़े हर पहलू को देखा जा रहा है।
सवाल: ये तो तय है कि एक पानी का स्रोत है, जो शहर के नीचे बह रहा है। जो जगह-जगह रिसाव पैदा करने की वजह बन रहा है।
जवाब: हां, यह देखा जाता है कि दरारों का पैटर्न क्या है। नीचे मॉश्चर है या नहीं। कितने वाइब्रेट में आ रहा है।
सवाल: हम लोग जो देख रहे हैं, उससे लग रहा है कि ऊपर से लेकर नीचे तक कोई एक किमी का हारिजेंटल दायरा है, जहां ये समस्या ज्यादा विकराल है।
जवाब: हां, यह एलाइनमेंट में दिख रहा है, लेकिन अभी तो हमारा मुख्य प्रयास प्रभावितों को तत्काल पुनर्वास देने पर है।
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