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रोहित ठाकुर व चेतन बरागटा।
– फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश की शिमला जिले में जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र में भाजपा ने दो बार वर्ष 2007 और वर्ष 2017 में कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाई थी। इस बार भी यहां मुकाबला कांटे का माना जा रहा है। विधानसभा क्षेत्र से छह प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। लेकिन 8 दिसंबर को ही तय होगा कि जीत किस दल को हासिल होती है। जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र हमेशा से कांग्रेस का एक मजबूत गढ़ रहा है। इस विधानसभा क्षेत्र में कई दशकों तक कांग्रेस के दिवंगत नेता रामलाल ठाकुर ने जीतते आए।
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वहीं एक बार पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह यहां के विधायक रहे। पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह को जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से ही अपने जीवन की एक मात्र हार का सामना भी करना पड़ा था। वर्ष 2007 व वर्ष 2017 में भाजपा के दिवंगत नेता नरेंद्र बरागटा ने कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाई थी। इस बार भाजपा ने नरेंद्र बरागटा के पुत्र चेतन को उम्मीदवार बनाया हैं। जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से इस बार छह प्रत्याशी मैदान में हैं। भाजपा से चेतन बरागटा, कांग्रेस से रोहित ठाकुर, माकपा से विशाल शांकटा, बसपा से राम पाल, आम आदमी पार्टी से श्रीकांत व सुमन कदम निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में हैं।
79.28 प्रतिशत रहा मतदान
जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में इस बार जमकर मतदान हुआ। पिछले सारे रिकॉर्ड इस बार टूट गए हैं। विधानसभा में 79.28 प्रतिशत मतदान हुआ है। जुब्बल-कोटखाई में कुल मतदाता 73,190 हैं। जिसमें 36,306 पुरुष और 36,884 महिला मतदाता हैं। इस बार कुल मतदान 58,022 हुआ है। वहीं 28,353 महिलाओं व 29,669 पुरुषों ने मतदान किया।
सीट को लेकर जुड़ा है रोचक सियासी संयोग
हिमाचल प्रदेश की शिमला जिले में जुब्बल-कोटखाई हलके के साथ रोचक सियासी संयोग भी जुड़ा है। पिछले वर्ष उप चुनाव के नतीजों की बात न करें तो दो दशक से इसी सीट के साथ यह संयोग बना है। इसके तहत विधानसभा चुनाव में बहुमत के साथ सत्ता में आने वाली पार्टी का प्रत्याशी ही यहां से विजयी होता रहा है। या कहें, जिस पार्टी का प्रत्याशी जुब्बल-कोटखाई से जीतता है, उसी पार्टी की सरकार बनती है। इस सियासी संयोग के आधार पर यह भी माना जाता रहा है कि जुब्बल कोटखाई के मतदाता सत्ता के साथ ही चलते आ रहे हैं। वर्ष 2003 से रोचक सियासी संयोग का यह सिलसिला जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में चला रहा है। वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से रोहित ठाकुर विजय रहे थे, तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। इसके बाद वर्ष 2007 में भाजपा से दिवंगत नरेंद्र बरागटा विजयी हुए थे। प्रदेश में भी भाजपा सत्ता में आई। वर्ष 2012 में कांग्रेस के रोहित ठाकुर विजयी रहे तो कांग्रेस की सरकार बनी। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा से नरेंद्र बरागटा ने जीत हासिल की थी। इस बार भी प्रदेश में भाजपा सत्ता में आई। पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा की मृत्यु के बाद वर्ष 2021 में उपचुनाव हुए। उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रोहित ठाकुर विजयी रहे थे। उपचुनाव की इस जंग में दिवंगत नेता नरेंद्र बरागटा के पुत्र चेतन बरागटा निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में चुनाव लड़े थे। इस बार चेतन बरागटा भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं।अब चुनावी नतीजे ही बताएंगे कि जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा यह सियासी संयोग इस बार भी कायम रखता है या नहीं।
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