Kanpur: 3 साल में दोगुना बढ़ गया चावल का निर्यात, व्यापारिक केंद्र होने से मिला लाभ, सब्सिडी भी बन रही मददगार

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Kanpur: Export of rice doubled in 3 years, benefited from being a trading center

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उद्योग नगरी कानपुर से कृषि उत्पादों के निर्यात में तीन साल में छह गुना का उछाल आया है। जिला कृषि विपणन विभाग के आंकड़ों से इस बात का खुलासा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार साल 2020-21 में 16.66 करोड़ रुपये के अनाज का निर्यात हुआ। वहीं, 2021-22 में यह बढ़कर 44.27 करोड़ रुपये और 2022-23 में 101.08 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार कृषि निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दे रही हैं। यूपी सरकार ने इसी क्रम में कृषि निर्यात नीति लागू की है। इस नीति के तहत सड़क और हवाई माध्यम से खाद्य उत्पाद के निर्यात के लिए सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। हालांकि 2022-23 में नीति के साथ साथ रूस-यूक्रेन युद्ध ने निर्यात बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। दरअसल, यूक्रेन और रूस अनाज के एक बड़े निर्यातक थे, जो दक्षिण एशियाई देशों के अलावा खाड़ी देशों को अनाज सप्लाई करते थे। लेकिन युद्ध के बाद निर्यात पर असर पड़ा जिसके बाद इन देशों ने भारत से संपर्क साधना शुरू कर दिया।

व्यापारिक केंद्र होने का मिला लाभ

कानपुर हमेशा से ही औद्योगिक हब रहा है, इसलिए इसके व्यापारिक केंद्र होने का लाभ ज्यादा मिला है। कानपुर के ज्येष्ठ कृषि विपणन अधिकारी विनोद कुमार बताते हैं कि रूस यूक्रेन युद्ध के बाद एशियाई देशों और खासकर खाड़ी देशों के आयातकों ने कानपुर के निर्यातकों से संपर्क किया। कृषि निर्यात नीति के आने के बाद से हर साल निर्यात में इजाफा हो रहा है। विनोद कुमार कहते हैं कि पेस्टिसाइड अवशेष की ज्यादा मात्रा के विवाद के चलते भारत के बासमती चावल के निर्यात में कुछ कमी आई थी, लेकिन इसका असर यह हुआ कि गैर बासमती चावल का निर्यात दोगुना तक बढ़ गया। हालांकि अब फिर से बासमती चावल के निर्यात में सुधार हुआ है।

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