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इस अवधि में दिसंबर में सबसे अधिक सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया। सर्दी शुरू हुई तो 31 दिसंबर से लगातार 11 दिन धूप ही नहीं निकली। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के मौसम विभाग के प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार पिछले एक वर्ष में हुए शोधों में जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम का संतुलन बिगड़ने की बात सामने आई है। आने वाले दिनों में इसका असर फसलों के उत्पादन व लोगों पर भी दिखेगा।
मौसम चक्र में गड़बड़ी की वजह से 25 से 30 प्रतिशत फसलें प्रभावित हो सकती हैं। ग्रीष्म और शीत लहर की वजह से जीवन पर भी प्रभाव पड़ रहा है। अचानक हार्ट अटैक होना इसी का नतीजा है। मौसम के इस बदलाव को लेकर यूनीसेफ की ओर से कई तरह के अध्ययन किए गए हैं।
इस तरह से हो रहा बदलाव
– पृथ्वी का तापमान प्रतिवर्ष बढ़ रहा है, ऐसे में अत्यधिक धूप के कारण निम्न दबाव वाला सिस्टम बनता है। इस कारण आंधी और अन्य ऊष्णकटिबंधीय तूफानों की संख्या बढ़ रही है।
– जब बहुत ठंडी उच्च दबाव वाली प्रणाली, बहुत गर्म कम दबाव वाली प्रणाली से मिलती है, तो समुद्र अत्यधिक ऊंची लहरों की संभावना बढ़ जाती है।
– कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा है, इससे पृथ्वी का तापमान भी बढ़ रहा है। पृथ्वी का तापमान बढ़ने से जलवाष्प की मात्रा भी बढ़ जाती है, जो भारी वर्षा और बर्फबारी का कारण बनती है।
हमारे पास मौसम का जो भी डाटा है, उसके हिसाब से गर्मी, बारिश और अब सर्दी का यह सीजन काफी चौंकाने वाला है। आंकड़ों के अनुसार पिछले 122 वर्षों में मौसम की ऐसी स्थितियां नहीं दिखी हैं। जलवायु परिवर्तन का असर अब तेजी से दिखने लगा है।– डॉ. एसएन पांडेय मौसम विभाग प्रमुख सीएसए
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