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केदार
– फोटो : अमर उजाला
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पढ़-लिखकर बॉक्सर बनने का सपना संजोने वाले उत्तराखंड के युवक को नहीं मालूम था कि हालात से मजबूर होकर उसे पलायन के दर्द से गुजरना होगा। उत्तराखंड में माकूल इलाज नहीं मिलने पर अपने पिता को खो देने से मायूस केदार ने दिल्ली का रुख किया।
बॉक्सिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन की बदौलत अपने पिता की याद में अस्पताल बनाने की ख्वाहिश को पूरा करने के लिए उसने कड़ी मेहनत की। स्नातक तक की पढ़ाई के बावजूद उत्तराखंड के युवक ने सुरक्षा गार्ड के तौर पर कुछ दिनों तक नौकरी की। हालात से परेशान होकर रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले उत्तराखंड के युवाओं की दास्तां को फीचर फिल्म ‘केदार’ में जीवंत रूप में पेश किया गया। हिल्सवन स्टूडियोज और देशी इंजन प्रोडक्शन के बैनर तले बनी उत्तराखंड की पृष्ठभूमि पर आधारित इस हिंदी फीचर फिल्म के प्रीमियर शो का सोमवार को फिल्म डिवीज़न ऑडिटोरियम में आयोजन किया गया।
इस मौके पर केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री अजय भट्ट एवं डिवाइन मैनीफैसटेसन्स की संस्थापक प्रीता कात्याल बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। कहानी केदार के सपनों के उड़ान के साथ शुरू होती है। पहाड़ों में बचपन गुजारने के बाद बॉक्सर बनने के लिए दिल्ली पहुंचा। इस दौरान जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। फिर भी हिम्मत नहीं हारी।
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