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मंगलवार सुबह पांच बजे से कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ-साथ बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति चल उत्सव विग्रह डोली में विराजमान होकर रावल निवास से मंदिर परिसर में पहुंचेगी। यहां पर रावल भक्तों को आशीर्वाद देंगे। इसके बाद रावल एवं श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के पदाधिकारियों की मौजूदगी में प्रशासन की ओर से मंदिर के कपाट खोले जाएंगे।
इसके बाद मुख्य पुजारी शिवलिंग गर्भ गृह में भगवान केदारनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद ग्रीष्मकाल के लिए केदारनाथ के दर्शन शुरू हो जाएंगे। वहीं बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय और सीईओ योगेंद्र सिंह ने बताया कि मंदिर को सजाया जा चुका है। साथ ही यात्रा को लेकर अन्य सभी तैयारियां भी पूरी कर दी गई हैं।
सोमवार को सुबह सात बजे से ही सोनप्रयाग से श्रद्धालु केदारनाथ जाने लगे थे। दिन चढ़ने के साथ ही यात्रियों की संख्या में इजाफा होता रहा जिससे गौरीकुंड, जंगलचट्टी, भीमबली, छोटी लिनचौली, बड़ी लिनचौली से लेकर केदारनाथ धाम तक रौनक बढ़ती रही। मौसम की दुश्वारियों के बीच पैदल मार्ग पर बाबा के जयकारे और भजन कीर्तनों के साथ भक्तों का उल्लास अपने चरम पर रहा।
दिल्ली से आए राकेश जौहर, मधु जौहर और गीता सोनी ने बताया कि वह बीस अप्रैल को ही ऊखीमठ पहुंच गए थे और बाबा की डोली के साथ धाम के लिए चल रहे हैं। राकेश जौहर पिछले 38 वर्षो से कपाट खुलने के मौके पर धाम पहुंचते आ रहे है। वहीं, उड़ीसा के दो युवा श्रद्धालु पीके शर्मा और देवाशीष ने बताया कि वह पहली बार बाबा के दर्शनों के लिए आए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों से श्रद्धालु केदारनाथ पहुंच रहे है।
सोमवार को दोपहर बारह बजे से दो बजे तक केदारनाथ में हल्की बर्फबारी हुई। इसके बाद भी जीएमवीएन और यात्रा से जुड़े अन्य विभागों के लोग यात्रा व्यवस्थाओं में जुटे रहे। सोमवार को सुबह से ही केदारनाथ में घने बादल छाए हुए थे और दोपहर बारह बजे बर्फबारी शुरू हो गई जो लगभग दो घंटे तक होती रही। डीएम मयूर दीक्षित और पुलिस अधीक्षक डाॅ. विशाखा अशोक भदाणे ने स्वयं यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारी, कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया।
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