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केदारनाथ में उड़ान भरता हेलीकॉप्टर
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केदारनाथ धाम के लिए हर साल संचालित होने वाली हेली सेवा तो शुरू हो गई, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हो पाए। हेली सेवा शुरू होने से पहले ही हुए हेलिकॉप्टर हादसे में यूकाडा के वित्त नियंत्रक अमित सैनी की मौत ने इसकी कलई खोल कर रख दी।
अधिक से अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में हेली कंपनियां सुरक्षा प्रबंधों की अनदेखी करती हैं। इसके चलते यात्रियों की जान को खतरा बना रहता है। जानकारों के मुताबिक, हेलीपैड पर पहुंचने के बाद यात्रियों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। टिकट मिलने के बाद उन्हें केदारनाथ धाम तक उड़ान भरने का जो समय दिया जाता है, ज्यादातर मामलों में वे उस समय पर यात्रा नहीं कर पाते। उन्हें लंबा इंतजार कराया जाता है।
हेलिपैड पर जाने से पहले नहीं दी जाती जानकारी
हेलिपैड पर पहुंचने से पहले यात्रियों को सुरक्षा मानकों के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी जाती। जबकि कायदे से उन्हें सबसे पहले यह बताया जाना चाहिए कि हेलिपैड पर उन्हें किन बातों का ध्यान रखना है, क्या करना है और क्या नहीं करना है।
आनन फानन हेलिपैड पर बताया जाता है क्या करें
जब यात्री हेलिपैड पर पहुंच जाते हैं, तब वहां खड़े क्रू मेंबर यात्रियों को बताते हैं कि उन्हें कहां खड़ा होना है। उन्हें जिस आक्रामकता के साथ निर्देश दिए जाते हैं, ज्यादातर यात्री घबरा जाते हैं। कई बार वे समझ नहीं पाते कि उन्हें क्या करना है। हेलिकॉप्टर के हेलिपैड पर पहुंचते ही वहां खड़े क्रू मेंबर यात्रियों को आनन-फानन में हेलिकॉप्टर में चढ़ाते हैं। मिनटों के भीतर हेलिकॉप्टर यात्रियों को उतारता है और उसी क्षण उसमें यात्री बैठते हैं। ऐसी स्थिति में जरा सी असावधानी बड़े हादसे की वजह बन सकती है।
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