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बर्फ के पहाड़ पर चढ़ते प्रशिक्षु।
– फोटो : संवाद
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बंगलूरू, दिल्ली, मुंबई, गुड़गांव, पुणे और गोवा से 13 प्रशिक्षु वीरवार को बर्फ के पहाड़ पर चढ़ने के गुर सीखने के लिए लाहौल-स्पीति जिला के छेलिंग गांव पहुंचे। बेशक पहाड़ ऊंचा है, लेकिन इनके हौसले पहाड़ से भी ऊंचे हैं। यहां ये प्रशिक्षु माइनस डिग्री तापमान में बर्फ के पहाड़ पर चढ़ने के साथ छह दिन तक नई-नई तकनीक सीखेंगे।
अटल टनल रोहतांग के बनने के बाद लाहौल घाटी में भी विंटर टूरिज्म बढ़ रहा है। समर सीजन में यहां की चंद्रभागा नदी में रिवर राफ्टिंग के बाद क्याकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। अब घाटी में आइस क्लाइंबिंग बाहरी युवाओं को आकर्षित कर रहा है। छेलिंग गांव के युवाओं ने हाल ही में एक चट्टान पर बर्फ का पहाड़ तैयार किया तो वीरवार को यहां पिती धार क्लब के युवाओं ने चढ़ाई की।
छेलिंग गांव के समीप स्थानीय युवाओं द्वारा बनाए बर्फ के पहाड़ पर बाहरी राज्यों के प्रशिक्षुओं ने वीरवार को क्लाइंबिंग के साथ प्रशिक्षण भी लिया। इस शिविर में बंगलूरू, दिल्ली, मुंबई, गुड़गांव, पुणे और गोवा राज्यों से 13 प्रशिक्षुओं ने बर्फ के पहाड़ पर चढ़ने का प्रशिक्षण लिया। प्रेरणा डांगी कुमाऊं की देखरेख में प्रशिक्षक भारत भूषण और अनिल बेलवाल 13 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
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