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लखीमपुर खीरी में बारिश के मौसम में जंगल में पानी भर जाने से बाघ, तेंदुए और हाथी खेतों में घूमते नजर आ रहे हैं तो वहीं मगरमच्छ आबादी के निकट तालाबों और झीलों में आ पहुंचे हैं। ये मगरमच्छ इंसानों और पशुओं पर हमले कर रहे हैं। कई बार तो यह मगरमच्छ गांवों के अंदर तक घुस आए। पिछले दिनों बिजुआ क्षेत्र के एक गांव में मगरमच्छ रात भर चारपाई के नीचे बैठा रहा।
बारिश के मौसम में अधिकांश नदियां उफान पर हैं। नदियों के शांत पानी में रहने वाले मगरमच्छ बहाव तेज होने के कारण नदियों से निकलकर तालाबों में आ गए हैं। तालाबों में मछली पकड़ने के लिए जाने वाले ग्रामीण और तालाब के आसपास चरने जाने वाले पशु इन मगरमच्छों का शिकार हो रहे हैं। जिले में बरसात का मौसम शुरू होने के बाद से अब तक करीब छह लोग मगरमच्छ के हमलों का शिकार हो चुके हैं।
सबसे ज्यादा निघासन प्रभावित
मगरमच्छ के हमले में सबसे ज्यादा मौतें निघासन तहसील क्षेत्र में हुई हैं। यहां पिछले पांच साल में छह लोगों की मौत हो चुकी है। कई पशु भी मगरमच्छ का निवाला बने हैं।
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