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सम्राट चौधरी औरंगाबाद में और दायें सुजीत मेहता का प्रोफाइल फोटो।
– फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
कहते हैं कि लोहा ही लोहे को काटता है। लोहा से ही लोहे को काटने का खेल लोकसभा चुनाव में औरंगाबाद में भी हो रहा है। भाजपा उम्मीदवार सुशील सिंह को जीत हासिल कराने के लिए उप मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं, ताकि वह अपने गठबंधन एनडीए समर्थित भाजपा प्रत्याशी और निवर्तमान सांसद सुशील सिंह को चुनाव जीता सकें।
विपक्षी प्रत्याशी का कुशवाहा होना खेल की वजह
यदि इस सीट से उनकी स्वजाति यानी कुशवाहा जाति का विपक्षी गठबंधन का उम्मीदवार नही होता तो निः संदेह उन्हें भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में कुशवाहों को गोलबंद करने में आसानी होती, लेकिन ऐसा नही हो पा रहा है। इसकी माकूल वजह भी है। वजह विपक्षी इंडी-महागठबंधन समर्थित राजद प्रत्याशी अभय कुमार सिंह का कुशवाहा होना और कुशवाहा जाति की वोटिंग का चरित्र है।
चार दिनों में दो बार औरंगाबाद आ चुके सम्राट चौधरी
यही वजह है कि कुशवाहा जाति से आनेवाले सम्राट चौधरी चार दिनों में दो बार औरंगाबाद आ चुके है। पिछली बार चार दिन पहले के दौरे में भी उन्होंने कुशवाहों को साधने की कोशिश की और शनिवार को औरंगाबाद के कुटुम्बा गढ़ में सभा के माध्यम से भी उन्होंने यही कोशिश की। इस कोशिश में आज उन्होंने नया पैंतरा लिया और कुशवाहों की दुःखती रग पर हाथ रखने वाला भी दांव चला। उन्होंने विपक्षी गठबंधन और नेताओं पर सीधे प्रहार करने के बाद कुशवाहों के नब्ज पर हाथ रख दी।
सुजीत मेहता हत्याकांड के दोषियों को दिलाएंगे सजा
सम्राट चौधरी ने कुटुम्बा की सभा में अम्बा के बहुचर्चित सुजीत मेहता हत्याकांड की चर्चा कर भाजपा से नाराज और दूर चल रहे कुशवाहा जाति के लोगों को गोलबंद करने की कोशिश की। इस कोशिश में उन्होंने कहा कि सुजीत मेहता हत्याकांड में शामिल कोई भी अपराधी बख्शा नहीं जाएगा। उसे हर हाल में सजा मिलेगी। उस वक्त यदि बिहार में एनडीए की सरकार होती तो यह काम उसी वक्त हो गया होता। उन्होंने यह भी कहा कि अपराधियों की कोई जाति और धर्म नहीं होती है। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में सुशासन स्थापित करना है और यह तभी संभव है, जब सबको न्याय मिले।
5 अगस्त 2022 को हुई थी सुजीत मेहता की हत्या
दरअसल 5 अगस्त 2022 को अम्बा थाना क्षेत्र में बतरे नदी पुल के पास सुजीत मेहता की अपराधियों ने उस वक्त गोली मार कर हत्या कर दी थी, जब वह अपने गांव दधपा बिगहा लौट रहे थे। हत्या के बाद यह मामला उबल पड़ा था। इसे लेकर तमाम तरह के धरना-प्रदर्शन और आंदोलन हुए थे। प्रदेश की राजधानी पटना से अम्बा आने का नेताओं का तांता लग गया था। उस वक्त यह मामला बेहद चर्चित रहा था। आंदोलन के बाद पुलिस ने मामले में गिरफ्तारियां भी की थी और कुछ ने कोर्ट में सरेंडर भी किया था। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसी मामले को उठाकर सम्राट चौधरी ने कुशवाहा वोटों की फसल काटने का दांव आजमाया है।
कुशवाहा वोटो के मायने की वजह
औरंगाबाद लोकसभा सीट पर कुशवाहा वोटो के मायने काफी अहम है, क्योंकि यहां राजपूत वोटरो से कुशवाहा वोटरो की संख्या 50 हजार ही कम है। इसी से कुशवाहा वोटो के महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है। संख्या बल भी कुशवाहो पर डोरे डालने की वजह-औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र में वोटर्स की संख्या के मामले में एक नंबर पर राजपूत है जिनकी संख्या 2 लाख 25 हजार है। वही दूसरे नंबर पर यादव है जिनकी संख्या 2 लाख और तीसरे नंबर पर कुशवाहा- दांगी है जिनकी संख्या 1 लाख 75 हजार है। इसके अलावा रविदास की संख्या 1 लाख 50 हजार, भुईयां जाति की संख्या लाख 50 हजार, पासवान की संख्या 1 लाख 25 हजार मुस्लिमों की संख्या 1 लाख 25 हजार है। संख्या बल के साथ ही राजद कैंडिडेट का कुशवाहा जाति से होना और राजद का माय समीकरण अभय कुशवाहा की ताकत को बढ़ा रहा है। इसी ताकत को कम करना भाजपा को इस सीट पर फतह करने के लिए जरूरी है और सम्राट चौधरी इसी जरूरत को पूरा करने में लगे है।
जरूरत पूरा करने में आड़े आ रहा कुशवाहा जाति को वोटिंग ट्रेंड
दरअसल कुशवाहा जाति के वोटिंग ट्रेंड के बारे में यह बात आम है कि कुशवाहा जाति वोट के मामले में दल नही बल्कि अपनी जाति को देखती है। चुनाव में संबंधित सीट पर अपनी जाति का उम्मीदवार नही होने पर ही यह जाति अपनी जाति के बड़े नेताओं के इशारे पर दूसरी जाति के नेता को वोट देती है। वही अपनी जाति के कैंडिडेट को किसी भी दल से होने पर यह जाति उसी को वोट करती है। दरअसल सम्राट चौधरी इसी मिथक को तोड़ने में लगे है।
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