Lok Sabha Elections: सियासी जमीन का पता नहीं, जातीय आंकड़ों पर नजर; जानिए इन दो लोकसभा सीटें के समीकरण

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political parties keep an eye on caste data in Lok sabha election 2024

लोकसभा चुनाव।
– फोटो : अमर उजाला

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चुनावी बिसात पर जनता के मुद्दों के साथ ही जातीय समीकरणों को इस बार भी पूरी तरजीह दी जा रही है। राजनैतिक दलों से लेकर प्रत्याशियों तक ने अपनी-अपनी लोकसभा सीट पर जातिगत व धार्मिक आधार पर मतदाताओं का वर्गीकरण कर रखा है। उसी आधार पर उन्हें रिझाने व लुभाने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। 

बात बरेली व आंवला लोकसभा सीट की हो तो यहां का चुनाव भी इससे अछूता नहीं। पार्टियों व राजनैतिक विश्लेषकों के गुणा-गणित के हिसाब से कहीं मुस्लिम और कुर्मी मतदाता बहुसंख्यक हैं तो कहीं पिछड़ा वर्ग व अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। पार्टियों ने टिकट वितरण में भी जातीय समीकरण का ध्यान रखा है। चुनाव में जीत की राह भी प्रत्याशी इन्हीं समीकरणों को साधकर तय करने में जुटे हैं।

मुस्लिम और कुर्मी वोटर माने जा रहे निर्णायक

बरेली लोकसभा क्षेत्र में 18 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। राजनैतिक जानकारों के अनुसार इनमें मुस्लिम वोट बहुलता में हैं। कुर्मी, वैश्य वोटर भी अच्छी संख्या में हैं। राजनैतिक दलों ने अपने स्तर पर जो जातीय आकलन कराया है, उसके अनुसार शहर की सीट पर मुस्लिम मतदाता करीब सात लाख की संख्या में हैं। वहीं कुर्मी मतदाताओं की संख्या लगभग छह लाख है। जीत के लिए इन बड़े धड़ों को मुख्य रूप से रिझाने के साथ ही अन्य वर्गों को पक्ष में लाने की कोशिश उम्मीदवारों की रहती है। 

यहां अन्य में अनुसूचित वर्ग का वोट करीब सवा दो लाख बताया जा रहा है। वैश्य मतदाता पौने दो लाख, कश्यप व मौर्य डेढ़-डेढ़ लाख, ब्राह्मण व कायस्थ सवा-सवा लाख और सिख व पंजाबी मतदाता करीब एक लाख हैं। बाकी में अन्य वर्ग के वोटर हैं। इसी क्रम में जातिवार मतदाताओं को उनकी संख्या और उनके प्रभाव के अनुसार रिझाने की जद्दोजहद इस समय भी तेज है।

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