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प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : Pixabay
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बलरामपुर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के डॉ. डीवी सेठ के अनुसार ज्यादा टीवी, मोबाइल, लैपटॉप आदि देखने से आंखों से जुड़ी बीमारी हो सकती है। इससे मायोपिया बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है। मायोपिया ही आगे चलकर ग्लूकोमा में बदलता है। वे अस्पताल में ओपीडी ब्लॉक में ग्लूकोमा सप्ताह पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में बोल रहे थे।
अस्पताल के सीएमएस डॉ. जीपी गुप्ता ने कहा कि आंखों की गंभीर बीमारी ग्लूकोमा के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। ग्लूकोमा का कोई सटीक इलाज नहीं है। इसलिए 40 साल की उम्र पार करने वालों को साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच करानी चाहिए।
अस्पताल के निदेशक डॉ. रमेश गोयल ने कहा कि अगर परिवार के किसी सदस्य को ग्लूकोमा हो चुका है तो उसे ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी और नेत्र परीक्षण अधिकारी सर्वेश पाटिल ने बताया कि ओपीडी में आए मरीजों में से 389 मरीजों की आंखें जांची गईं। इसमें 73 मरीजों में ग्लूकोमा के लक्षण मिले हैं।
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