Madhumita Murder Case: मधुमिता की बहन बोलीं- अमरमणि की रिहाई से हैरान, समर्थकों में खुशी; जानिए पूरा मामला

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Madhumita s sister Nidhi surprise over release of Amarmani Tripathi in Madhumita Shukla murder case

मधुमिता की बहन और अमरमणि
– फोटो : अमर उजाला

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कवियत्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी करार दिए जाने के बाद उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमिता त्रिपाठी को शासन ने रिहा करने का आदेश जारी कर दिया है। राज्यपाल की अनुमति पर कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग ने इसका आदेश जारी किया है। यह खबर सुनकर उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कवियत्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के दोषियों को समय से पहले रिहा करने के आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही दोषियों की रिहाई को बरकरार रखा। अब रिहाई के आदेश पर मधुमिता के परिजनों की प्रतिक्रिया सामने आई है। मधुमिता की बहन निधि शुक्ला ने तीखी प्रतिक्रया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वह शासन के आदेश से हैरान हैं। कहा कि राज्यपाल को भ्रमित करके इस तरह का आदेश जारी कराया गया है जो पूरी तरह अनुचित है।

निधि शुक्ला ने कहा कि उम्रकैद की सजा पाए अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमिता त्रिपाठी वर्ष 2012 से लगातार गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में रूम नंबर 15 और 16 में रह रहे हैं। जबकि वह उत्तराखंड की हरिद्वार जेल के कैदी हैं। इस संबंध में उन्होंने (निधि शुक्ला) ने सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट की अवमानना की याचिका दायर कर रखी है। इसकी 25 अगस्त को सुनवाई थी। उन्होंने बताया कि इस मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए आठ सप्ताह में जवाब मांगा है। 

निधि शुक्ला ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की याचिका दाखिल करने के बाद पिछले 15 दिन से शासन और राज्यपाल को पत्र और मेल भेज कर लगातार अनुरोध करती रही हैं कि सुप्रीम कोर्ट से अवमानना की याचिका पर फैसला आने तक कोई कार्रवाई न की जाए। इसके बावजूद राज्यपाल के आदेश पर कारागार प्रशासन और सुधार विभाग ने अमर मणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी की जमानत पर रिहा करने के आदेश जारी कर दिए इससे उन्हें काफी हैरानी हुई है। उनका कहना है कि सत्ता के दबाव में राज्यपाल को भ्रमित करके इस तरह का आदेश जारी कराया गया है। जबकि वह इस संबंध में पर्याप्त सबूत शासन को दे चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस आदेश से पीड़ित महिलाओं को न्याय की आस और विश्वास को धक्का लगा है।

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