[ad_1]
जानिए पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान कर लें और साफ सुथरे कपड़े पहन लें. इसके बाद देवी सिद्धिदात्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित एक चौकी पर स्थापित करें. उसी स्थान पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, की स्थापना भी करें. इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा माता महागौरी सहित समस्त स्थापित देवताओं की पूजा करें. मां सिद्धिदात्री की चार भुजाएं हैं. इनकी दाहिनी ओर की पहली भुजा में गदा और दूसरी भुजा में चक्र है. बांई ओर की भुजाओं में कमल और शंख है. इनका आसन कमल का फूल है. मां सिद्धदात्री की पूजा- अर्चना से वैभव और यश की प्राप्ति होती है. वहीं इस दिन कन्या पूजन के लिए 2 से 10 वर्ष की आयु की कन्याओं को आमंत्रित करें. उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं. फिर कुछ दक्षिणा या कोई अन्य वस्तु उनको दें.
मां सिद्धिदात्री का मंत्र
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
मां सिद्धिदात्री की आरती
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में तो न कोई विधि है
तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तुम सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उसके रहे न अधूरे!!
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता!!
हवन और पूजा का शुभ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार नवमी तिथि के दिन हवन और कन्या पूजन का विधान है. पंचांग के मुताबिक हवन के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 20 मिनट से दोपहर 2 बजकर 21 मिनट तक है. इसके अलावा नवरात्रि व्रत-पारण के लिए शुभ समय दोपहर 2 बजकर 21 मिनट के बाद कर सकते हैं.
नवरात्रि की नवमी पर है हवन का विधान
नवरात्रि की नवमी पर हवन करने का विधान है. इसमें देवी से सहस्त्रनामों का जाप करते हुए हवन में आहूति दी जाती है. मान्यता है नवमी पर हवन करने से नौ दिन के तप का फल कई गुना और शीघ्र प्राप्त होता है.
महानवमी के दिन करें कन्या पूजन
महानवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है. नौ कन्याओं का इस दिन के भोजन के लिए आमंत्रित करना चाहिए. इन सभी को मां दुर्गा के नौ रूप मानकर पूजन किया जाता है. पूजन-भोजन के पश्चात नौ कन्याओं और एक बटुक(बालक) को उपहार भेंट करना चाहिए. कहते हैं कन्या पूजन से पूरे नवरात्रि की पूजा का दोगुना फल मिलता है.
नवरात्रि महोत्सव का समापन दिन होता है नवमी तिथि
अश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि नवरात्रि महोत्सव का समापन दिन होता है. इस दिन मां दुर्गा के नौवें रूप देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है.
महानवमी पर बन रहा ये शुभ योग
महानवमी के दिन रवि व सुकर्मा योग का शुभ संयोग बन रहा है. रवि योग 4 अक्टूबर को पूरे दिन रहेगा. सुकर्मा योग 4 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 23 मिनट के बाद प्रारंभ होगा.
जानें शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:53 से 4:41 तक
प्रातः संध्या: सुबह 5:17 से 6:30 तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:51 तक
रवि योग: पूरे दिन रहने वाला है
अमृत काल: शाम 04:52 से 6:22 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:26 से 3:14 तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:13 से 06:37 तक
नवमी तिथि 2022 पर शुभ मुहूर्त (Maha Navami 2022 Shubh Muhurat)
नवमी तिथि पर नवरात्रि का समापन होता है, इस दिन मां सिद्धिदात्री और दुर्गा माता की पूजा के बाद हवन और कन्या पूजन किया जाता है. नवमी तिथि पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6:21 से दोपहर 2:20 तक रहने वाला है. जो भक्त कन्या पूजन के बाद व्रत पारण करना चाहते हैं वह दोपहर 2:20 के बाद व्रत तोड़ सकते हैं.
[ad_2]
Source link