Maha Shivratri : पांडवों के अज्ञातवास से लाया गया शिवलिंग बना आस्था का केंद्र, पुजारी परिवार से जुड़ी है कहानी

[ad_1]

Maha Shivratri 2024 Shivaling brought from exile incognito of Pandavas became faith center Laldhang Haridwar

पांडवों के अज्ञातवास गुजारने वाले स्थान से लाया गया शिवलिंग
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


पांडवों के अज्ञातवास गुजारने वाले स्थान से लाया गया शिवलिंग लोगों की आस्था का केंद्र बन गया है। सपने में आए शिवलिंग को एक व्यक्ति ने जंगल से बेलगाड़ी में लाकर स्थापित किया था। तब से ही मंदिर में लोगों की श्रद्धा बढ़ती चली आ रही है। महाशिवरात्रि पर मंदिर में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लोग जलाभिषेक करते हैं।

मंदिर में स्थापित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि शिवलिंग प्राचीन काल के प्रस्तर शिल्प का उत्कृष्ट नमूना है। पुजारी लीलावती के पुत्र सत्येन्द्र उपाध्याय ने बताया कि उनके पूर्वज को सपने में (पांडव अज्ञातवास) पांडववाली स्रोत से शिवलिंग को लाकर स्थापित करने को कहा गया।

इस पर अगले दिन उपाध्याय परिवार ग्रामीणों को लेकर बेलगाड़ी से शिवलिंग को लेने पांडववाली स्रोत पहुंचे, लेकिन वह लगभग 5 फीट गोलाई और लगभग 8 फीट ऊंचाई के शिवलिंग को लाख कोशिशों के बाद भी हिला नहीं सके। निराश होकर सभी लोग अपने घरों को लौट गए। उसी दिन पुजारी परिवार के उसी व्यक्ति के सपने में अकेले ही शिवलिंग लेकर आने का आदेश हुआ।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *