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इस दिन पहली बार प्रकट हुए थे शिवजी
ऐसा मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन शिवजी ज्योतिर्लिंग यानी अग्नि के शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे. ये शिवलिंग इतना विशालकाय था कि इसकी शुरुआत और अंत का पता ही नहीं लग पा रहा था. तब ब्रह्माजी हंस के रूप में शिवलिंग के ऊपरी भाग को देखने के लिए गए. वहीं दूसरी ओर भगवान विष्णु भी वराह के रूप में शिवलिंग के आधार को ढूंढने के लिए गए. लेकिन दोनों ही सफल नहीं हो पाए क्योंकि इस शिवलिंग का न तो आदि था और न ही अंत.
इस दिन शिव और शक्ति का हुआ था मिलन
महाशिवरात्रि की पूरी रात शिवभक्त भगवान शिव की अराधना करते हैं. शिवजी की शादी का उत्सव मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन शिवजी के साथ शक्ति की शादी हुई थी. इसी दिन शिवजी ने अपना वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था.
व्रत और पूजन विधि
‘ॐ नमः शिवाय’ मन्त्र का उच्चारण जितनी बार हो सके करें एवं शिवमूर्ति और भगवान शिव की लीलाओं का चिंतन करें. रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शंकर की पूजा अर्चना करनी चाहिए .अभिषेक के जल में पहले प्रहर में दूध, दूसरे में दही ,तीसरे में घी, और चौथे में शहद को शामिल करना चाहिए. दिन में केवल फलाहार करें, रात्रि में उपवास करें. हांलाकि रोगी, अशक्त और वृद्धजन रात्रि में भी फलहार कर सकते है . इस दिन शिव की पूजा करने से जीव को अभीष्ट फल की प्राप्ति अवश्य होती है.
महाशिवरात्रि व्रत का महत्व (Maha Shivratri Vrat Importance)
हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है. ये पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक है. महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के भक्त व्रत रखते हैं और विधि विधान शिव की पूजा करते हैं. इस दिन शिवलिंग पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा, शहद, दूध आदि चीजें जरूर चढ़ानी चाहिए. इससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं. धार्मिक मान्यताओं अनुसार जो व्यक्ति महाशिवरात्रि व्रत सच्चे मन से और विधि विधान रखता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं.
व्रत की महिमा
महाशिवरात्रि व्रत परम मंगलमय और दिव्यतापूर्ण है ,यह व्रत चारों पुरुषार्थों धर्म, अर्थ,काम और मोक्ष को देने वाला माना गया है. इस दिन जो प्राणी परमसिद्धिदायक भगवान शिव का व्रत,अभिषेक और पूजन करते हैं वह परम भाग्यशाली होता है. भगवान श्री राम ने स्वयं कहा है कि-‘ शिव द्रोही मम दास कहावा ! सो नर मोहि सपनेहुँ नहिं भावा !!’अर्थात जो शिव का द्रोह करके मुझे प्राप्त करना चाहता है वह सपने में भी मुझे प्राप्त नहीं कर सकता. यही वजह है कि इस दिन शिव आराधना के साथ ही श्री रामचरितमानस के पाठ का भी बहुत महत्त्व होता है . एक अन्य कथा के अनुसार माता पार्वती ने एक बार भगवान शिव से पूछा कि कौनसा व्रत उनको सर्वोत्तम भक्ति व पुण्य प्रदान कर सकता है ,तब भोलेशंकर ने स्वयं इस दिन का महत्व बताया था कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी की रात्रि को जो उपवास करता है ,वह मुझे प्रसन्न कर लेता है .में अभिषेक,वस्त्र,धूप,अर्घ्य तथा पुष्प आदि से उतना प्रसन्न नहीं होता जितना कि व्रत-उपवास से.
महाशिवरात्रि पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान शिव जी की पूजा-अर्चना करते हैं. इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा, शहद, दूध आदि चीजें चढ़ाई जाती हैं. महाशिवरात्रि पर कई लोग रुद्राभिषेक भी कराते हैं. मान्यता है भोलेनाथ इससे जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं. महाशिवरात्रि पर शिव जी के साथ माता पार्वती की पूजा भी जरूर करें. क्योंकि शिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात्रि होती है.
महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त 2023
महाशिवरात्रि की निशिता काल पूजा मुहूर्त 12:09 बजे से देर रात 01:00 बजे तक है. महाशिवरात्रि पर प्रात:काल से ही शिव पूजा होती है, लेकिन 18 फरवरी को सुबह 08:22 बजे से 09:46 बजे तक शुभ उत्तम मुहूर्त है. लाभ उन्नति मुहूर्त दोपहर 02:00 बजे से दोपहर 03:24 बजे तक है. अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर 03:24 बजे से शाम 04:49 बजे तक है. दिन में आप इन मुहूर्तों में पूजा कर सकते हैं.
कब है महाशिवरात्रि?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, 18 फरवरी को रात 08:02 बजे से फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि लग रही है और यह अगली सुबह 19 फरवरी को शाम 04:18 बजे समाप्त हो रही है. निशिता काल पूजा मुहूर्त के आधार पर महाशिवरात्रि 18 फरवरी शनिवार को है.
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