Mahashivratri: 27 साल बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ संयोग, नोट कर लें रात्रि के चारों पहर की पूजा का शुभ मुहूर्त

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महाशिवरात्रि पर भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाएंगे। 27 वर्षों के बाद महाशिवरात्रि पर गुरु और शनि की युति मीन राशि पर बन रही है जो बेहद शुभ संयोग का निर्माण कर रही है। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि पर भूत-भावन भोलेनाथ का शुभ मंगल विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था। ऐसे में उनकी पूजा और दर्शन से सभी ग्रह बाधाओं से मुक्ति मिलेगी। साथ ही सर्व मनोकामनाओं की पूर्ति होगी। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी नगरी काशी केवल विश्व का एक ऐसा स्थान है जहां पर चतुर्दश शिवलिंग उपस्थित हैं। वहां दर्शन पूजन कर समस्त बाधाओं से मुक्त हो सकते हैं।



भारतीय पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि 18 फरवरी को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि 17 फरवरी को रात्रि 8:02 मिनट से शुरू होगी और 18 फरवरी को शाम 4:18 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि को मानें तो महाशिवरात्रि 18 को ही मनेगी।  


श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय के अनुसार राशिवार रुद्राभिषेक करके समस्त बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है। जिन लोगों की राशि का ज्ञान नहीं है वह लोग अपनी कामना के अनुसार भी रुद्राभिषेक करा सकते हैं।


महाशिवरात्रि में निशीथ काल पूजा मुहूर्त    18 फरवरी, रात्रि 12:16 बजे से 1:06 बजे तक

  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय      शाम 6:30 बजे से 09:35 बजे तक
  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय    रात्रि 9:35 बजे से तड़के 12:39 बजे तक
  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय     19 फरवरी, प्रात: 12:39 बजे से 03:43 बजे तक
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा का समय 19 फरवरी, प्रात: 3:43 बजे से 06:47 बजे तक
  • पारण मुहूर्त                          19 फरवरी को सुबह 6: 57 बजे से दोपहर 3:33 बजे तक


राशिवार ऐसे करें पूजन

  • मेष: देशी गाय के कच्चे दूध में शहद मिलाकर अभिषेक करें।
  • वृष: दही से अभिषेक करें, सफेद पुष्प, सफेद फल और सफेद वस्त्र चढ़ाएं।
  • मिथुन: गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें, धतूरा, हरा पुष्प ,भांग व हरा फल चढ़ाएं।
  • कर्क: दूध में शक्कर मिलाकर रुद्राभिषेक करें, सफेद वस्त्र, मिष्ठान्न व मदार का पुष्प चढ़ाएं। 
  • सिंह: मधु या तीर्थ मिश्रित गुड़ से अभिषेक करें, लाल पुष्प, वस्त्र और श्री रोली अर्पित करें। 
  • कन्या: गन्ने के रस से अभिषेक करें, भांग, धतूरा, मंदार का पत्र व पुष्प चढ़ाना चाहिए।
  • तुला: मधु से रुद्राभिषेक कराएं, भाग, मंदार पुष्प और सफेद वस्त्र चढ़ाएं। 


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