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वहीं, उनकी चिता को मुखाग्नि बड़े भाई भूपिंद्र सिंह ने दी। इस दौरान समूचा क्षेत्र अरविंद जिंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारों से गूंज उठा। बलिदान हुए जवान अरविंद की अंतिम यात्रा में शामिल हजारों लोगों की आंखें नम थीं। लोगों में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा था। दो दिन पहले जवान की पार्थिव देह के इंतजार में पत्नी बिंदु और माता निर्मला ने दो दिन से पानी की एक बूंद भी नहीं पी थी।
सुबह 8:00 बजे तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह सेना के वाहन से उनके घर पर पहुंचाई गई। पत्नी बिंदु ने दुल्हन के लिबास में अपने पति के अंतिम दर्शन किए। शहीद की अंतिम यात्रा और अंतिम दर्शन के लिए सैकड़ों लोग, प्रशासनिक अधिकारी और सेना के जवान मौजूद थे। जवान के परिजनों, ग्रामीणों और रिश्तेदारों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
पत्नी बिंदु दोनों नन्हीं बेटियों को सीने से लगाकर फूट-फूट कर रो रही थीं। माता का भी बुरा हाल था। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने शेर आया शेर आया, भारत माता की जय, पाकिस्तान मुर्दाबाद, शहीद अरविंद अमर रहे के नारे लगाए। सेना के जवानों ने पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ शहीद जवान को सलामी दी।
अरविंद की दो ओर चार साल की नन्हीं परियां सानमीता और शानविका इस घटना से अनजान हैं। मां को रोते देख वे भी फफक-फफक कर रोने लगीं।
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