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मौनी अमावस्या।
– फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (मौनी अमावस्या) 21 जनवरी शनिवार को आस्था व श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। श्रद्धालु राप्ती सहित आसपास की पवित्र नदियों और सरोवरों में डुबकी लगाकर दान-पुण्य करेंगे।
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन अमावस्या तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात में दो बजकर 49 मिनट तक, पूर्वाषाढ़ नक्षत्र दिन में नौ बजकर 10 मिनट पश्चात उत्तराषाढ़ नक्षत्र है। इस दिन हर्षण योग भी दिन में दो बजकर 46 मिनट तक और इस दिन मातंग नामक शुभ औदायिक योग भी है।
मौनी अमावस्या का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, प्रत्येक अमावस्या को सूर्य और चंद्रमा का सम्मिलन होता है। सूर्य आत्मा का प्रतीक और चंद्रमा मन का कारक है। इस तिथि के स्वामी पितर गण हैं। इस तिथि पर दान-स्नान से देवताओं की कृपा के साथ पितरों की भी कृपा प्राप्त होती है।
इस दिन मनु ऋषि का जन्म भी माना जाता है। इसलिए इस दिन को मनु अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन मौन व्रत धारण करके ही स्नान करना चाहिए। तिल और गुड़ का दान करने से शनि और सूर्य की पीड़ा समाप्त हो जाती है। पीपल में सभी देवताओं का निवास माना जाता है। इसलिए पीपल की पूजा करें।
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