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बसपा सुप्रीमो मायावती।
– फोटो : amar ujala
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बसपा ने लोकसभा चुनावों को लेकर अपनी नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके अंतर्गत पहले की मंडल स्तरीय व्यवस्था को समाप्त करते हुए पूरे उत्तर प्रदेश को नौ सेक्टर में बांट दिया गया है। सभी सेक्टरों में दो से तीन पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। सभी पदाधिकारी अपने लोकसभा क्षेत्रों से संबंधित रणनीति बनाने के लिए स्वतंत्र होंगे और अपने क्षेत्र से संबंधित चुनावी गतिविधियों के लिए सीधे मायावती को रिपोर्ट करेंगे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बहुजन समाज पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपना पारंपरिक आधार वोट बनाए रखने की है। इसके लिए उसे दलितों-महादलितों के साथ मुसलमानों का साथ पाना है। पार्टी किसी सांप्रदायिक विभाजन को रोकने के लिए अभी से हर सेक्टर में विशेष पदाधिकारियों की नियुक्ति करेगी जो उसके मतदाताओं के बीच पार्टी की स्थिति को साफ करने का काम करेंगे।
बसपा नेता ने निचले स्तर पर संगठन की गतिविधियों को तेज करने के लिए सीधे पहल की है और कई योजनाओं के सहारे अपने कोर मतदाताओं तक पहुंचने और उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है। जब से भाजपा ने दलित-महादलित मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं के सहारे उनमें दखल देने की कोशिश की है, बसपा का यह वोट बैंक उससे टूटा है। मायावती की सबसे बड़ी चुनौती इसी वोट बैंक को अपने साथ लाना है। यही कारण है कि मायावती का सबसे ज्यादा जोर अपने इन्हीं मतदाताओं की ‘घर वापसी’ कराने पर है।
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