MCD Election: दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा- केजरीवाल ने मुसलमानों के लिए क्या किया?

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MCD Election: Delhi Congress President Anil Chaudhary

MCD Election: Delhi Congress President Anil Chaudhary
– फोटो : Agency

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प्रश्न- फरवरी 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के ठीक बाद आपको पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया था। आपके अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली बड़ी चुनौती है। क्या इस नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की तस्वीर बदलेगी?

उत्तर- बिल्कुल, हम मजबूत तैयारी कर रहे हैं। जनता से संवाद का हमारा कार्यक्रम लगातार चल रहा है। हमने सभी क्षेत्रों में मजबूत प्रत्याशी दिए हैं। जनता के लिए हमने महत्त्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। यदि हम निगम की सत्ता में आए तो, अब तक के लंबे समय से पड़े हाउस टैक्स को पूरी तरह माफ कर एक नई शुरुआत की जाएगी। इसी तरह की कई और घोषणाएं हम करने वाले हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि इस चुनाव में हम पिछली बार की तुलना में बड़ी सफलता हासिल करेंगे। 

प्रश्न- आपका खोया जनाधार आपकी तरफ वापस लौटे, इसके लिए आपने क्या प्रयास किए हैं, इस चुनाव में यह जनाधार किस हद तक आपके पास वापस आने की उम्मीद है?

उत्तर- आप कांग्रेस का इतिहास जानते हैं। हमने जनता के लिए संघर्ष कर उसके दिलों में अपनी जगह बनाई है। आजादी के समय लोगों के साथ स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी, आज उसके अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। आज कई मायने में स्थिति ज्यादा गंभीर है। एक राजनीतिक दल संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा समाप्त कर अपना एजेंडा देश में चलाना चाहता है, तो दूसरा दल केवल झूठ, छल-प्रपंच की राजनीति कर सत्ता में बना रहना चाहता है। वहीं, हमने हमेशा सेवा का मार्ग अपनाया। जब मैं अध्यक्ष बना, हमारे सामने कोरोना काल से निपटने की चुनौती थी। हमने अपनी जान की परवाह न करते हुए लोगों की सेवा की, गरीब प्रवासी श्रमिकों को उनके घर भेजने की व्यवस्था की। हमने अपने कई साथियों को खोया, फिर भी हम सेवा में डटे रहे। आज भी हमारे नेता राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पर हैं और देश को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। अब यह जनता को ही तय करना है कि वह किसे अपना जनप्रतिनिधि बनाना चाहती है।

प्रश्न- दलित, मुसलमान और गरीब प्रवासी, ये आपके कोर वोटर रहे हैं। आम आदमी पार्टी और भाजपा ने इनके लिए काफी आकर्षक योजनाएं पेश की हैं। ये वर्ग आपके साथ आए, इसके लिए आप क्या प्रयास कर रहे हैं?

उत्तर- मैं पूछना चाहता हूं कि अरविंद केजरीवाल ने मुसलमानों के लिए क्या किया? जब शाहीन बाग में नागरिकता कानून के विरोध में आंदोलन हो रहे थे, केजरीवाल वहां कभी नहीं गए। जब दिल्ली के दंगे हो रहे थे, वे घर से बाहर नहीं निकले। दंगों के बाद भी वे किसी पीड़ित से मिलने नहीं गए। जब कोरोना काल आया, तब पता नहीं किसके दबाव में दिल्ली सरकार ने तब्लीगी जमात के लोगों को कोरोना फैलाने का जिम्मेदार ठहरा दिया। मौलाना साद के ऊपर गंभीर मामले दर्ज कर दिए गए। तब अरविंद केजरीवाल कहां थे? आज जब गुजरात में चुनाव हो रहे हैं, केजरीवाल बिल्किस बानो के सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों की रिहाई पर चुप हैं? मैं पूछना चाहता हूं कि क्या उन्हें मुसलमानों से वोट मांगने का हक है?    

इसी तरह दिल्ली में संत रविदास मंदिर तोड़ दिया गया। केंद्र सरकार से लेकर दिल्ली सरकार तक चुप रही। सर्वोच्च न्यायालय में यह कहा गया कि मंदिर को दोबारा बनाया जाएगा। लेकिन दो साल बीत चुके हैं, अब तक वहां एक ईंट नहीं रखी गई है? दलित समाज के आराध्य का अपमान करने के बाद भी क्या केजरीवाल उनसे वोट मांग सकते हैं? कोरोना काल में गरीब प्रवासी मजदूरों को भोजन देने की बजाय उन्हें बसों में भरकर आनंदविहार बस अड्डे पर मरने के लिए छोड़ दिया गया। क्या उन गरीब प्रवासियों से दिल्ली सरकार को वोट मांगने का हक है? मैं बहुत विश्वास के साथ आपसे कहना चाहता हूं कि केजरीवाल की कलई उतर गई है। अब दलित-मुसलमान-प्रवासी श्रमिक उन्हें वोट देने के लिए तैयार नहीं है। यह वर्ग पहले भी हमसे जुड़ा रहा है, अब यह दुबारा हमारे पास आ रहा है। नगर निगम के चुनाव परिणाम आपको इसका प्रमाण देंगे। 

प्रश्न- भाजपा और आम आदमी पार्टी बेहद आक्रामक चुनाव  प्रचार कर रहे हैं। आपका प्रचार कुछ सुस्त दिखाई पड़ रहा है।

उत्तर- केवल आक्रामक चुनाव प्रचार से चुनाव जीते जाते तो भाजपा दिल्ली में 2015 और 2020 में नहीं हारती। आम आदमी पार्टी उत्तराखंड-गोवा में चुनाव न हारती। जिन्होंने बेहतर शिक्षा का दावा किया था, वे अब शराब बांटने और घोटाला करने के आरोप में पकड़े जा रहे हैं। तिहाड़ जेल में आरोपियों को फाइव स्टार होटलों वाली सुविधाएं दी जा रही हैं। ऐसी राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलती। हम पूरी तरह जमीनी स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। हमारे नेता-प्रत्याशी मतदाताओं से संपर्क में हैं। उनके छल-प्रपंच की राजनीति के समाप्त होने का समय आ गया है। हम दिल्ली की राजनीति में मजबूत वापसी करेंगे।

प्रश्न- आपके बड़े नेता चुनाव प्रचार से अब तक दूर हैं। क्या हम उनकी जनसभाएं-रोड शो हम आने वाले दिनों में देखेंगे।

उत्तर- अगर आप राहुल गांधी की बात कर रहे हैं, तो वे भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त हैं। उनका समय मिलना मुश्किल है। लेकिन अन्य नेता लगातार प्रचार कर रहे हैं। हम स्थानीय चुनाव को स्थानीय स्तर पर ही लड़ते आए हैं, इस बार भी वही रणनीति है। हमें पूरी उम्मीद है कि परिणाम हमारे अनुसार ही होंगे।

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प्रश्न- फरवरी 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के ठीक बाद आपको पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया था। आपके अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली बड़ी चुनौती है। क्या इस नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की तस्वीर बदलेगी?

उत्तर- बिल्कुल, हम मजबूत तैयारी कर रहे हैं। जनता से संवाद का हमारा कार्यक्रम लगातार चल रहा है। हमने सभी क्षेत्रों में मजबूत प्रत्याशी दिए हैं। जनता के लिए हमने महत्त्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। यदि हम निगम की सत्ता में आए तो, अब तक के लंबे समय से पड़े हाउस टैक्स को पूरी तरह माफ कर एक नई शुरुआत की जाएगी। इसी तरह की कई और घोषणाएं हम करने वाले हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि इस चुनाव में हम पिछली बार की तुलना में बड़ी सफलता हासिल करेंगे। 

प्रश्न- आपका खोया जनाधार आपकी तरफ वापस लौटे, इसके लिए आपने क्या प्रयास किए हैं, इस चुनाव में यह जनाधार किस हद तक आपके पास वापस आने की उम्मीद है?

उत्तर- आप कांग्रेस का इतिहास जानते हैं। हमने जनता के लिए संघर्ष कर उसके दिलों में अपनी जगह बनाई है। आजादी के समय लोगों के साथ स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी, आज उसके अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। आज कई मायने में स्थिति ज्यादा गंभीर है। एक राजनीतिक दल संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा समाप्त कर अपना एजेंडा देश में चलाना चाहता है, तो दूसरा दल केवल झूठ, छल-प्रपंच की राजनीति कर सत्ता में बना रहना चाहता है। वहीं, हमने हमेशा सेवा का मार्ग अपनाया। जब मैं अध्यक्ष बना, हमारे सामने कोरोना काल से निपटने की चुनौती थी। हमने अपनी जान की परवाह न करते हुए लोगों की सेवा की, गरीब प्रवासी श्रमिकों को उनके घर भेजने की व्यवस्था की। हमने अपने कई साथियों को खोया, फिर भी हम सेवा में डटे रहे। आज भी हमारे नेता राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पर हैं और देश को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। अब यह जनता को ही तय करना है कि वह किसे अपना जनप्रतिनिधि बनाना चाहती है।

प्रश्न- दलित, मुसलमान और गरीब प्रवासी, ये आपके कोर वोटर रहे हैं। आम आदमी पार्टी और भाजपा ने इनके लिए काफी आकर्षक योजनाएं पेश की हैं। ये वर्ग आपके साथ आए, इसके लिए आप क्या प्रयास कर रहे हैं?

उत्तर- मैं पूछना चाहता हूं कि अरविंद केजरीवाल ने मुसलमानों के लिए क्या किया? जब शाहीन बाग में नागरिकता कानून के विरोध में आंदोलन हो रहे थे, केजरीवाल वहां कभी नहीं गए। जब दिल्ली के दंगे हो रहे थे, वे घर से बाहर नहीं निकले। दंगों के बाद भी वे किसी पीड़ित से मिलने नहीं गए। जब कोरोना काल आया, तब पता नहीं किसके दबाव में दिल्ली सरकार ने तब्लीगी जमात के लोगों को कोरोना फैलाने का जिम्मेदार ठहरा दिया। मौलाना साद के ऊपर गंभीर मामले दर्ज कर दिए गए। तब अरविंद केजरीवाल कहां थे? आज जब गुजरात में चुनाव हो रहे हैं, केजरीवाल बिल्किस बानो के सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों की रिहाई पर चुप हैं? मैं पूछना चाहता हूं कि क्या उन्हें मुसलमानों से वोट मांगने का हक है?    

इसी तरह दिल्ली में संत रविदास मंदिर तोड़ दिया गया। केंद्र सरकार से लेकर दिल्ली सरकार तक चुप रही। सर्वोच्च न्यायालय में यह कहा गया कि मंदिर को दोबारा बनाया जाएगा। लेकिन दो साल बीत चुके हैं, अब तक वहां एक ईंट नहीं रखी गई है? दलित समाज के आराध्य का अपमान करने के बाद भी क्या केजरीवाल उनसे वोट मांग सकते हैं? कोरोना काल में गरीब प्रवासी मजदूरों को भोजन देने की बजाय उन्हें बसों में भरकर आनंदविहार बस अड्डे पर मरने के लिए छोड़ दिया गया। क्या उन गरीब प्रवासियों से दिल्ली सरकार को वोट मांगने का हक है? मैं बहुत विश्वास के साथ आपसे कहना चाहता हूं कि केजरीवाल की कलई उतर गई है। अब दलित-मुसलमान-प्रवासी श्रमिक उन्हें वोट देने के लिए तैयार नहीं है। यह वर्ग पहले भी हमसे जुड़ा रहा है, अब यह दुबारा हमारे पास आ रहा है। नगर निगम के चुनाव परिणाम आपको इसका प्रमाण देंगे। 

प्रश्न- भाजपा और आम आदमी पार्टी बेहद आक्रामक चुनाव  प्रचार कर रहे हैं। आपका प्रचार कुछ सुस्त दिखाई पड़ रहा है।

उत्तर- केवल आक्रामक चुनाव प्रचार से चुनाव जीते जाते तो भाजपा दिल्ली में 2015 और 2020 में नहीं हारती। आम आदमी पार्टी उत्तराखंड-गोवा में चुनाव न हारती। जिन्होंने बेहतर शिक्षा का दावा किया था, वे अब शराब बांटने और घोटाला करने के आरोप में पकड़े जा रहे हैं। तिहाड़ जेल में आरोपियों को फाइव स्टार होटलों वाली सुविधाएं दी जा रही हैं। ऐसी राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलती। हम पूरी तरह जमीनी स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। हमारे नेता-प्रत्याशी मतदाताओं से संपर्क में हैं। उनके छल-प्रपंच की राजनीति के समाप्त होने का समय आ गया है। हम दिल्ली की राजनीति में मजबूत वापसी करेंगे।

प्रश्न- आपके बड़े नेता चुनाव प्रचार से अब तक दूर हैं। क्या हम उनकी जनसभाएं-रोड शो हम आने वाले दिनों में देखेंगे।

उत्तर- अगर आप राहुल गांधी की बात कर रहे हैं, तो वे भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त हैं। उनका समय मिलना मुश्किल है। लेकिन अन्य नेता लगातार प्रचार कर रहे हैं। हम स्थानीय चुनाव को स्थानीय स्तर पर ही लड़ते आए हैं, इस बार भी वही रणनीति है। हमें पूरी उम्मीद है कि परिणाम हमारे अनुसार ही होंगे।



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