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– फोटो : अमर उजाला।
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फर्जी दस्तावेज के जरिये एमएमएमयूटी के बीटेक पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले 40 में से 35 छात्र हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। कोर्ट ने उन्हें प्रवेश के लिए प्रस्तुत सही दस्तावेजों को प्रस्तुत करने का एक और मौका दिया है। अब छात्रों को 31 जनवरी तक विश्वविद्यालय प्रशासन को सही प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना होगा। ये दस्तावेज कुलसचिव के माध्यम से विश्वविद्यालय के एकेडमिक काउंसिल के सामने प्रस्तुत करना होगा।
हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन को आदेश दिया है कि इस बीच छात्रों को आयोजित हो रही विश्वविद्यालय की परीक्षा में शामिल होने दिया जाए। वहीं कोर्ट के आदेश से पहले सही प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी 25 जनवरी तक का मौका दे रखा है।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद प्रवेश निरस्त वाले पांचवें सेमेस्टर के 21 व सातवें सेमेस्टर के एक छात्र (लेटरल एंट्री) को बाकी बची परीक्षाओं को देने का अवसर मिल गया है। हालांकि उनका परिणाम तबतक घोषित नहीं होगा, जबतक वह सही दस्तावेज उपलब्ध कराकर निर्दोष नहीं साबित हो जाते। छात्रों को आवंटन पत्र और फीस की रसीद प्रस्तुत करनी होगी।
वर्तमान में विश्वविद्यालय में पहले, तीसरे, पांचवें और सातवें सेमेस्टर की परीक्षा चल रही है। ऐसे में कोर्ट के इस आदेश के बाद संबंधित विद्यार्थी केवल वहीं परीक्षा दे सकेंगे, जो अभी होनी बाकी हैं। जिन 35 छात्रों ने हाईकोर्ट में राहत की अपील की है, उनमें 21 छात्र पांचवें सेमेस्टर, 14 छात्र तीसरे सेमेस्टर और एक छात्र सातवें सेमेस्टर का शामिल है।
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