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LG Manoj Sinha
– फोटो : सोशल मीडिया
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जम्मू शहर का मास्टर प्लान गरीबों को आवास मुहैया कराने पर आधारित होना चाहिए। झोपड़पट्टी में रहने वालों को घर देना इसकी प्राथमिकता हो। साथ ही साथ अधिकारियों के लिए नियोजित टाउनशिप, पुराने शहरों को कम करने के लिए नए व्यापार केंद्रों पर ध्यान देना चाहिए। मास्टर प्लान शहर के विकास और समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़ा हुआ होना चाहिए। गरीबों का कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन जो लोग सक्षम और अमीर हैं, उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
माई टाउन माई प्राइड के अंतिम दिन गुलशन मैदान जम्मू पहुंचे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी और सार्वजनिक-भागीदारी, लोगों के कल्याण तंत्र को मजबूत करना, स्थानीय अर्थव्यवस्था को विकसित करने, उज्जवल भविष्य के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण करना जरूरी है। साथ ही शहरी परिवर्तन के दो महत्वपूर्ण पहलू भी जीवन की गुणवत्ता में सुधार के सर्वोत्तम साधन हैं। उनके साथ साथ शासन प्रशासन के कई अधिकारी, जम्मू के मेयर राजिंदर शर्मा, डिप्टी मेयर बलदेव बलोरिया भी मौजूद रहे।
इससे पहले उन्होंने यहां लगाए गए सभी 44 स्टालों का निरीक्षण किया। साथ ही सरकार की योजनाओं के प्रमाण भी बांटे। उन्होंने कहा कि पब्लिक आउटरीच कार्यक्रम के माध्यम से हम लोगों को शहरी परिवर्तन के केंद्र में रख रहे हैं और विकास को गति देने, स्थानीय शासन को सशक्त बनाने और लोगों के घर तक सेवाओं की निर्बाध डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए शहरों की पूरी क्षमता को अनलॉक कर रहे हैं।
विकासात्मक पहल के लिए लोगों की भागीदारी एक निर्णायक कारक है क्योंकि हर शहर की चुनौतियां और अवसर अलग-अलग होते हैं। लिहाजा शहरी विकास योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए परामर्शी अधिकारी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, स्थानीय वार्ड सदस्यों के साथ कार्य करें।
जम्मू एजुकेशन हब की ओर अग्रसर
उप राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जम्मू को शैक्षणिक संस्थानों के शहर में बदल दिया है। दुनिया भर में मंदिरों के शहर के रूप में जाना जाने वाला जम्मू शैक्षिक संस्थानों का केंद्र भी बन गया है क्योंकि यह देश का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां एम्स, आईआईएम, आईआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं। भविष्य में भी कई शिक्षण संस्थान खोलने पर विचार चल रहा है और कई प्रस्ताव बनाए गए हैं।
संसाधन जुटाना समय की आवश्यकता
उपराज्यपाल ने कहा कि संसाधन जुटाना समय की जरूरत है और इसे हमारी कार्य योजना का हिस्सा बनना चाहिए। निर्बाध ऑनलाइन सार्वजनिक सेवा वितरण और बेहतर बुनियादी ढांचे के लिए प्रयास, भीड़भाड़ कम करने की योजना, परिवहन, नई सार्वजनिक जगह का निर्माण, सार्वजनिक सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और सरल बनाना, शहरों की ब्रांड स्थिति, एक जिला एक उत्पाद, शहरी आजीविका मिशन, शहरों का सौंदर्यीकरण, नदियों, झीलों और पार्कों का संरक्षण और कायाकल्प सार्वजनिक आउटरीच के कुछ महत्वपूर्ण पहलू हैं जिन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
हर वार्ड के 25 युवाओं को रोजगार
‘माई टाउन माई प्राइड’ पब्लिक आउटरीच कार्यक्रम युवाओं को सशक्त बनाने के लिए स्वरोजगार सृजन और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देता है। एमटीएमपी अभियान के दौरान प्रत्येक वार्ड से 25 युवाओं को स्वरोजगार सहायता और कौशल प्रशिक्षण के लिए चिह्नित किया जा रहा है। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि पथ विक्रेताओं के कल्याण की योजना पात्र हितग्रहियों तक पहुंचे।
राजस्व बढ़ाने पर जोर दें
उप राज्यपाल ने नगर निगमों और वार्डों में स्वच्छता प्रतियोगिताओं के आयोजन का आह्वान किया। उन्होंने सभी हितधारकों के साथ समन्वय में राजस्व सृजन के लिए व्यवहार्य योजनाओं का पता लगाने के लिए मेयर और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों को आगे आने के लिए कहा। नगर निगमों को धन प्रवाह पर उप राज्यपाल ने कहा कि सब कुछ पूरी पारदर्शिता के साथ और जीएफआर और अन्य नियमों के अनुसार किया जा रहा है। किसी को भी किसी भी मामले में इसका उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इसे एक राष्ट्र संविधान द्वारा कानून के तहत चलाया जाता है और लोगों को अधिकारों और कर्तव्यों के बीच एक अच्छा संतुलन बनाने की आवश्यकता होती है।
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