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वाराणसी में केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर बना पंडाल
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दुर्गा पूजा की परंपरा तो अनवरत चली आ रही है लेकिन आयोजनों के स्वरूप में समय के साथ बदलाव नजर आ रहा है। डिजिटल इंडिया के दौर में दुर्गा पूजा के पंडाल भी कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। वाराणसी शहर के पंडालों ने चंदा और दान के लिए डिजिटल पेमेंट पर जोर दिया है। क्यूआर कोड, यूपीआई के साथ ही ऑनलाइन खाते में चंदे की राशि ली जा रही है।
मिनी बंगाल के रूप में मशहूर बनारस में दुर्गा पूजा के उत्सव का रंग अब धीरे-धीरे चटख होने लगा है। षष्ठी तिथि पर मूर्तियों की स्थापना के साथ ही तीन दिवसीय नवरात्र उत्सव की शुरुआत पंडालों में हो जाएगी। दुर्गा पूजा के आयोजन में डिजिटल इंडिया का असर साफ नजर आ रहा है। पूजा कमेटियां चंदा इकट्ठा करने के लिए क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर रही हैं।
चंदे की रसीद बुक पर क्यूआर कोड
कई कमेटियों ने चंदे की रसीद बुक पर अपनी कमेटी का क्यूआर कोड लगा दिया है। तो कई ने पूजा पंडाल के पास बैनर बनाकर क्यूआर कोड लगा दिया है, ताकि लोग आसानी से चंदा ऑनलाइन दे सकें। पूजा कमेटियों का मानना है कि इस सुविधा का इस्तेमाल होने से कई ऐसे श्रद्धालु हैं, जिनके पास जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। उनके व्हाट्सएप पर रसीद का फोटो, क्यूआर कोड भेजने पर वह सहयोग राशि ऑनलाइन भेज दे रहे हैं।
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