Navratri 2023: बेलवा माता मंदिर में मांगी गई हर मन्नत होती है पूरी! जानें दिउलपुर शहर से दिउलिया गांव कैसे बना

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Navratri 2023: Belwa Mata Temple worship Bettiah, Know how Diulia village was formed from Diulpur city

श्री बेलवा माता मंदिर, बेतिया
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


बिहार के बेतिया के दिउलपुर शहर में कालांतर में राजा रहा करते थे। राजा के पलायन के बाद दिउलपुर शहर को दिउलिया गांव का नाम दिया गया। साथ ही गांव में बेलवा माता मंदिर बनाया गया। लोगों का ऐसा मानना है कि इस मंदिर में मांगी गई सभी मन्नतें पूरी होती हैं। जहां श्रद्धालु दूर-दूर से मन्नतें मांगने आते हैं। बेलवा माता मंदिर बेतिया जिले के मैनाटाड़ प्रखंड मुख्यालय से सटे बेलवाडीह माई स्थान के पास स्थित है।

जानकारी के मुताबिक, श्री बेलवा माता का मंदिर लगभग 18वीं सदी से मैनाटांड़ के रमपुरवा बेलवाडीह में स्थापित है। मंदिर के संस्थापक बाबा नारायण दास और ग्रामीण अनिल पटेल, नीरज कुमार, प्रविन्दर कुमार, अक्षय कुमार आनंद, पूर्व मुखिया अशोक कुमार राम, शोभा देवी, संजू देवी, मंजू देवी, किरण कुमारी, ममता देवी और अनुराधा रावत ने बताया कि यहां किसी राजा का राजमहल हुआ करता था। यहां बहुत बड़ा गांव तत्कालीन शहर था, जिसे लोग आज भी दिउलपुर शहर के नाम से जानते हैं।

राजा के पलायन के बाद शहर बन गया दिउलिया गांव

दिउलपुर शहर के राजा द्वार पर अर्थात मुख्य द्वार पर श्री बेलवा माता की स्थापना की गई थी। राज परिवार द्वारा भी इनकी पूजा की जाती थी। बताया जा रहा है कि यहां खुदाई करने पर तरह-तरह की सामग्री आज भी मिलती है, जिससे यह सिद्ध होता है कि यहां पहले कोई बड़ा शहर जरूर था। कालांतर में किसी कारणवश यहां से राजा का पलायन हो गया और इस दिउलपुर शहर को दिउलिया गांव का नाम दे दिया गया। यह मंदिर बेलवाडीह मंदिर के नाम से चर्चित हो गया। इसके अगल-बगल गांव जैसे दिउलिया रमपुरवा, मैनाटांड़, रामनगरी, लंगडी, बौद्ध बारवा, पीपरपाती नामक आदि गांव बस गए हैं। इस मंदिर में लोग दूर-दूर से मन्नतें मांगने आते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर में आकर मांगी गई मन्नतें कभी भी विफल नहीं होती हैं।

पड़ोसी देश से भी दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु

यहां ग्रामीणों द्वारा शारदीय नवरात्र में भी माता की भव्य पूजा-अर्चना की जाती है। माता के दर्शन के लिए नेपाल से भी भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। लोग बताते हैं कि मां के प्रकोप से ही राजा का विनाश हो गया। ग्रामीण भी रोज मरने लगे फलतः बचे हुए लोग गांव छोड़कर भाग गए।

इस स्थान पर बाबा नारायण दास सन 1987 के चैत नवरात्र से माता के दरबार की झाड़ूदारी कर रहे हैं। उन्होंने मां के स्थान को पेड़-पौधे, फूल-पत्ती से सजा दिया है। माता के दरबार में लगाए गए पेड़-पौधों से बड़ा ही मनोरम दृश्य बन पड़ता है। उन्होंने कहा कि वे मां के स्थान पर मानव सेवा का उद्देश्य लेकर सबकी सेवा का कार्य करते हैं। प्राणी की सेवा ही उनका मात्र कार्य है। शारदीय नवरात्र के अवसर पर सैकड़ों माता-बहनें और श्रद्धालु व्रत रखते हैं। रोजाना आचार्य राजेश पांडे द्वारा सभी को एक साथ पूजा पाठ कराया जाता है। यहां विशाल मेला भी लगता है।

ग्रामीणों ने किया ये दावा

ग्रामीण अनिल पटेल ने बताया कि मैंने वर्ष 2012 में मां के दरबार में शीश झुकाकर एक मन्नत मांगी और वह एक साल के अंदर पूरी हो गई। वहीं, शोभा देवी ने कहा कि शादी के चार साल बीत जाने के बाद भी मुझे संतान की प्राप्ति नहीं हो रही थी। जब मां दरबार में सच्चे दिल से जाकर संतान मांगी तो मुझे संतान की प्राप्ति हो गई। संजु देवी ने बताया कि मेरे पति संजय कुमार की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। काफी जगह इलाज कराने के बाद भी ठीक नहीं हो रहे थे तो गांव के लोगों के कहने पर मैं मंदिर पहुंची और मन्नत मांगी और मेरे पति ठीक हो गए।

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