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शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा नौ दिनों तक भक्तों पर अपना आशीष बरसाएंगी। भक्तों को शक्ति की आराधना के लिए इस बार पूरे नौ दिन मिलेंगे। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार से हो रही है और माता का आगमन अश्व पर हो रहा। अश्व पर सवार होकर माता का आगमन छत्रभंग और राजनीतिक अस्थिरता का सूचक होता है। बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय पांडेय ने बताया कि नवरात्र की शुरुआत 15 अक्तूबर से होगी। माता का आगमन अश्व पर और गमन महिष पर होगा। माता का आगमन और प्रस्थान दोनों शुभदायक नहीं है। 15 अक्तूबर से 23 अक्तूबर तक नवरात्र में नौ दुर्गा की आराधना होगी। 24 अक्तूबर को विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। प्रो. पांडेय ने बताया कि माता के अश्व पर आगमन देश में राजनीतिक अस्थिरता का संकेत देता है। इसके साथ ही माता का गमन महिष पर होने के कारण रोग और शोक का कारक होगा। महिष पर गमन होने के कारण देश में शोक और रोग बढ़ेंगे।
वहीं दूसरी तरफ नवरात्र की तैयारियां शहर भर में शुरू हो चुकी हैं। शिव की नगरी शक्ति की आराधना के लिए सजने लगी है। शहर से लेकर गांव तक पूजा पंडालों के निर्माण के साथ ही मूर्तियों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
वाराणसी शहर में एक तरफ जहां प्रदेश की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ थीम आधारित पंडालों के निर्माण पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। वरुणा पार इलाके में इस बार थीम आधारित पंडालों की संख्या सबसे अधिक रहेगी।
नवरात्र के लिए शहर के बाजार सज गए हैं। शहर के मुख्य बाजार गोदौलिया, दुर्गाकुंड, सिगरा, गुरुबाग आदि स्थानों पर शृंगार और पूजा की सामग्री की बिक्री हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि पितृ पक्ष के बाद खरीदारी जोर पकड़ेगी।
माता को गुड़हल का फूल चढ़ाया जाता है। ऐसे में वाराणसी का गुड़हल पूरे पूर्वांचल, मध्य प्रदेश, बिहार के साथ ही नेपाल तक जाता है। थोक व्यापारी संतोष पाल ने बताया कि नवरात्र के लिए ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं।
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