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– फोटो : अमर उजाला
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गंगा उस पार रेती पर टेंट सिटी बनाने वाली कंपनियों के कंक्रीट निर्माण के खिलाफ दायर वाद में शुक्रवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पर्यावरण मंत्रालय को खरी-खरी सुनाई। एनजीटी ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कछुओं को कैसे पता कि उनका घर बदल गया है। कछुआ सेंचुरी शिफ्ट किए जाने से संबंधित अधिसूचना वापस लेने का अधिकार केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को नहीं है। ट्रिब्यूनल ने सवाल किया कि मंत्रालय ने कछुआ सेंचुरी की अधिसूचना वापस लेने की जानकारी कछुओं को कैसे पता लगी? वहां से कछुए कहां चले गए? इस मामले में सुनवाई अब 6 फरवरी को होगी।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 15 दिसंबर 2023 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय पर नियमों का उल्लंघन करने पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। मंत्रालय की ओर से जुर्माने की राशि माफ करने के लिए दायर उस आवेदन (अंतरवर्ती आवेदन) पर शुक्रवार को हुई सुनवाई में पीठ ने कहा कछुआ सेंचुरी को इस तरह से कागज पर अधिसूचित करके नहीं हटाया जा सकता। आखिर कछुआ होंगे तभी आपने उसको कछुआ अभयारण्य घोषित किया होगा फिर कछुए गए कहां?
एनजीटी की प्रधान पीठ नई दिल्ली के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल एवं विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने पक्ष रखा। 15 दिसंबर को हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी के तीन सदस्यीय पीठ द्वारा वाराणसी में कछुआ सेंचुरी हटाने को लेकर जवाबी शपथपत्र नहीं जमा करने पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के रवैये को असहयोगात्मक मानते हुई उसपर 25 हजार का जुर्माना लगाया था। जिसके बाद 22 दिसंबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने वाराणसी में गंगा उसपार कछुआ सेंचुरी को हटाने के कारणों का जिक्र करते हुए शपथ पत्र दायर किया था।
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