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एमके स्टालिन लालू प्रसाद से मिलने पहुंचे।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
निष्कर्ष लोग निकाल रहे, आप सिर्फ घटनाक्रम यानी सिक्वेंस देखिए। क्योंकि, इसी सिक्वेंस को देखकर बिहार की राजनीति करने वाले दूरी या नजदीकी बना रहे हैं। इसमें जाति की राजनीति है, संवेदना की नीति भी। मौजूदा वजह है देशभर से भाजपा विरोधी दलों को जुटाने के क्रम में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का बिहार दौरा और उनके पटना पहुंचने का खुलकर हो रहा विरोध। इसी विरोध को दबाने के लिए भूमिहार जाति की राजनीति करते हुए राष्ट्रीय जन जन पार्टी बनाने वाले आशुतोष कुमार को नजरबंद रखा गया है।
मनीष कश्यप क्यों आया चर्चा में
आम आदमी से सीधे जुड़े मुद्दों पर सोशल मीडिया के जरिए अपने तरीके से बात रखने के कारण यूट्यूब से मनीष कश्यप की पहचान बनी। सरकारी तंत्र भले मनीष के खिलाफ था, लेकिन राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने उसे भाव दिया। इधर, तमिलनाडु में बिहारियों से मारपीट और हत्या की खबरें आईं। मौतों को घुमाकर तमिलनाडु-बनाम-बिहार की लड़ाई दिखाकर अफवाह फैलाने का आरोप लगा। 23 अप्रैल को मनीष कश्यप की गिरफ्तारी के पहले उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से उसकी ठन गई। मनीष ने कहा कि अगर वह जेल गया तो लौटने के छह महीने के अंदर तेजस्वी यादव की सरकार गिरा देगा।
नीतीश और तेजस्वी का स्टैंड अलग
तमिलनाडु में बिहारियों के साथ मारपीट और हत्या की खबरें आईं तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डीजीपी के जरिए वास्तविक हकीकत की जानकारी ली, जबकि तेजस्वी यादव मुखर हो गए। अंदरूनी हकीकत क्या है, यह तेजस्वी ही जानते होंगे लेकिन माहौल यही रहा कि मनीष कश्यप की गिरफ्तारी कराने में उनकी भूमिका थी। इस विवाद को हवा नहीं मिलता, अगर उसी समय तेजस्वी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन की बर्थडे पार्टी में नहीं गए होते। बिहार भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया कि जहां बिहारियों के साथ बुरा सलूक हो रहा, वहां राज्य के डिप्टी सीएम पार्टी कर रहे हैं। यह विवाद वक्त के साथ ठंडा गया था, लेकिन विपक्षी एकता के लिए 23 जून को पटना में होने वाली बैठक के लिए स्टालिन को बुलाने के साथ ही मुद्दा गरम हो गया।
जदयू के अध्यक्ष जिस जाति से, उसी से मनीष
20 जून को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तमिलनाडु निकलने के पहले बीमार होने के आधार पर अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। स्टालिन की कांग्रेस से खटपट चल रही, उसके अलावा मनीष कश्यप की गिरफ्तारी का मुद्दा भी तब तक माहौल बना चुका था। जदयू के अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भूमिहार जाति से हैं और इस जाति का भीषण दबाव है कि मनीष कश्यप को लेकर राजनीतिक दल अपना स्टैंड साफ करें। भूमिहार नेताओं ने इसी कारण मनीष की गिरफ्तारी पर या तो चुप्पी साधी या उसे गैरवाजिब ठहराया। इसमें कांग्रेस के भी नेता शामिल रहे, हालांकि तमिलनाडु पुलिस की कार्रवाई पर किसी की नहीं चली।
नीतीश न न्यौता देने गए, न स्वागत के लिए
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्टालिन को न्यौता देने के लिए उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ जदयू से मंत्री संजय झा को भेजा। हार्दिक अभिवादन वाला पत्र भी भेजा और पत्र के जरिए ही यह भी बता दिया कि स्टालिन आ रहे हैं। 22 जून को शाम में स्टालिन जिस समय आए, उस समय नीतीश ममता बनर्जी और वामपंथी नेताओं से मिलने के बाद अरविंद केजरीवाल-भगवंत मान से मिल रहे थे। उधर, तेजस्वी यादव स्टालिन का स्वागत करने पटना एयरपोर्ट गए और वहां से दोनों राबड़ी आवास पहुंचे। यहां स्टालिन ने राजद अध्यक्ष लालू से लंबी मुलाकात की।
अंदर ही अंदर माहौल गरम, इसलिए सुरक्षा सख्त
स्टालिन पटना एयरपोर्ट पर उतरे, तब सुरक्षा और बढ़ा दी गई थी। दूर-दूर तक किसी तरह का जुटान न हो- इसके लिए साफ और सख्त निर्देश थे। वजह यह कि दिनभर हजारों लोगों ने सोशल मीडिया पर #gobackstalin मुहिम चलाने के साथ ही 23 जून को पटना में सड़क पर प्रदर्शन का समर्थन किया था। मुहिम शुरू कर प्रदर्शन का एलान करने वाले भूमिहार-ब्राह्मण एकता मंच और राष्ट्रीय जन जन पार्टी के संस्थापक आशुतोष कुमार को भोजपुर में बिहार पुलिस ने नजरबंद कर लिया। उनका व्हाट्सएप-मोबाइल तक बंद है। कारगिल चौक पर सुबह 11 बजे प्रदर्शन न हो, इसके लिए भी पुलिस-प्रशासन मुस्तैद है।
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