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हिंदू धर्म में किसी भी काम को करने से पहले शुभ और अशुभ मुहूर्त का जरूर ध्यान रखा जाता है. पंचांक के अनुसार हर माह में 5 दिन ऐसे होते हैं, जिनमें शुभ कार्य करने की मनाही होती है. इन पांच दिनों को पंचक नाम से जाना जाता है.

शनिवार के दिन से शुरू होने के कारण इन्हें मृत्यु पंचक कहा जाएगा, जब चंद्रमा दो राशियों के साथ इन पांच नक्षत्र यानी शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, पूर्वाभाद्रपद, रेवती, पूर्वाभाद्रपद और धनिष्ठा नक्षत्र से होकर गुजरता है, तो इसे पंचक कहा जाता है.

पंचांग के अनुसार पंचक 13 जनवरी को रात में 11 बजकर 35 मिनट से पंचक शुरू हो रहे हैं, जो 18 जनवरी की सुबह 3 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगा. शनिवार के दिन शुरू होने के कारण इसे मृत्यु पंचक कहा जाएगा.

पंचक के आगे का नाम दिन के ऊपर निर्धारित होता है. शनिवार को शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहा जाता है. यह अन्य पंचकों से काफी खतरनाक होता है, इस पंचक के दौरान व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक समस्याएं अधिक होती है.
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