Paper Leak Case: जेई सिविल पेपर लीक मामले में मुकेश भारती और रणजीत को जमानत

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Paper leak case: Mukesh Bharti and Ranjeet granted bail in JE Civil paper leak case.

अदालत(सांकेतिक)
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


जिला सत्र न्यायालय हमीरपुर ने गुरुवार को पोस्ट कोड 970 जेई सिविल पेपर लीक मामले में आरोपी अभ्यर्थी मुकेश भारती और उसके पिता एवं प्रदेश बिजली बोर्ड के लाइनमैन पद से निलंबित रणजीत सिंह को सशर्त जमानत पर रिहा कर दिया। जबकि बर्खास्त ट्रैफिक इंस्पेक्टर रवि कुमार की जमानत अर्जी रद्द कर दी। साथ ही रवि कुमार की न्यायिक हिरासत को आगामी चौदह दिनों के लिए बढ़ा दिया। बीते 9 नवंबर को इस मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो की ओर से गठित विशेष जांच टीम(एसआईटी) ने अदालत में अपना पक्ष रखते समय दावा किया था कि इस मामले में सभी आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

एसआईटी ने 17 जून 2023 को पोस्ट कोड 970 जेई सिविल पेपर लीक मामले में भंग हो चुके चयन आयोग के पूर्व सचिव डॉ. जितेंद्र कंवर, अभ्यर्थी मुकेश कुमार, अभ्यर्थी के पिता रणजीत सिंह, बर्खास्त ट्रैफिक इंस्पेक्टर रवि कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया था। एसआईटी की ओर से की गई जांच में पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद मुख्य आरोपी उमा आजाद के खिलाफ भी इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई। अभ्यर्थी मुकेश भारती, अभ्यर्थी के पिता रणजीत सिंह, बर्खास्त ट्रैफिक इंस्पेक्टर रवि कुमार ने एसआईटी की गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रदेश उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में जमानत की अर्जी लगाई थी।

लेकिन उच्च न्यायालय ने 22 सितंबर, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने 13 अक्तूबर को जमानत देने से इंकार कर दिया। इस पर इन तीनों आरोपियों ने 18 अक्तूबर को विजिलेंस थाना हमीरपुर में आत्मसमर्पण कर दिया था। न्यायिक हिरासत में चल इन चारों में से मुकेश भारती और उसके पिता रणजीत सिंह को वीरवार को जमानत मिल गई। उमा आजाद की जमानत पर 29 नवंबर को जिला न्यायालय में सुनवाई होगी। उधर, एसपी विजिलेंस मंडी राहुल नाथ ने कहा कि मुकेश भारती और उसके पिता रणजीत सिंह को जमानत मिल गई है। 29 नवंबर को उमा आजाद की जमानत पर सुनवाई होनी है।

पीसी एक्ट की धारा 19 में मिलती है चालान पेश करने की अनुमति

भंग हो चुके हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर के पूर्व सचिव एवं एचएएस अधिकारी जितेंद्र कंवर के खिलाफ सरकार से पेपर लीक मामले में मुकदमा दर्ज करने की एसआईटी को पीसी एक्ट की धारा 17-ए में मंजूरी मिल चुकी है। एसआईटी ने उन्हें एक दर्जन पेपर लीक मामलों में आरोपी बनाया है। लेकिन अभी तक चालान पेश नहीं हो पाया है। आरोपी अधिकारी के खिलाफ चालान पेश करने के लिए पीसी एक्ट की धारा 19 में प्रदेश सरकार से अनुमति चाहिए।

 

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