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फाइल फोटो
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जिला कांगड़ा की विश्व प्रसिद्ध पैराग्लाइडिंग साइट बीड़ बिलिंग में देश-विदेश से हर वर्ष सैकड़ों पैराग्लाइडर पायलट पहुंचते हैं। यहां हर साल अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले होते हैं। लेकिन, आसमान में उड़ान भरने के दौरान पल-पल बदलते हवा के रुख से अंजान होने से कई विदेशी पैराग्लाइडर पायलट हादसे का शिकार हो जाते हैं।
वहीं समय पर रेस्क्यू अभियान शुरू न होने और अत्याधुनिक उपकरण न होने से कई पायलट काल का ग्रास बन चुके हैं। यही कारण है कि पिछले आठ दिन से एनडीआरएफ और रेस्क्यू टीमें लापता पोलैंड के पायलट का रेस्क्यू करने में नाकाम रही हैं। भले ही इन पायलटों के पास पैराग्लाइडर के सहारे हवा में उड़ने का अनुभव होता है, लेकिन पल-पल बदलती हवाओं का रुख नहीं समझ पाते। इसलिए क्रैश लैंडिंग का शिकार हो जाते हैं।
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