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संसद में प्रदर्शन के आरोपी के घर के बाहर लगा पोस्टर।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
संसद में प्रदर्शन केस के मुख्य आरोपी ललित झा मामले में नया मोड़ आ गया है। बुधवार को एक गाड़ी ललित झा के घर के नजदीक आकर रूकी। उस गाड़ी से कल्पना इनामदार नाम की महिला सहित तीन-चार लोगों के साथ बाहन निकली। वह ललित के घर गई। वहां उसके माता पिता से मिली। उनसे कहा ललित एक क्रांतिकारी व्यक्ति है। हम उसकी लड़ाई को आगे लड़ेंगे। यह कहते हुए ललित के घर के ऊपर एक बैनर को टांग दिया। इसपर राष्ट्रीय लोक आंदोलन समिति की अध्यक्ष महिला ने अपने आप को बताया है। बैनर पर संसद भवन सेंध में गिरफ्तार सभी आरोपियों के फोटो लगे हुए है।
कहा- देश में व्याप्त बेरोजगारी व महंगाई के विरुद्ध आवाज उठा रहे थे
राष्ट्रीय लोक आंदोलन मुंबई के कार्यकारी अध्यक्ष कल्पना ईमानदार बताते हुए ललित की मदद में आने की बात परिजनों से कही है। मामले के तथाकथित छह आरोपितों का फोटो लगे बैनर के नीचे कल्पना ईमानदार की भी तस्वीर लगी हुई थी। कल्पना ने ललित के माता-पिता से बातचीत करते हुए कहा कि ललित मोहन क्रांतिकारी युवक है। जन हित के मुद्दों को लेकर संसद भवन में में प्रदर्शन किया। कल्पना ने कहा कि किसी भी मांग को सरकार के समक्ष रखने का यह तरीका गलत है। इसकी मैं निंदा करता हूं। उन्होंने कहा कि ललित झा से उसका पुराना परिचय रहा है। वह और उसके साथी देश में व्याप्त बेरोजगारी व महंगाई के विरुद्ध आवाज उठा रहे थे।
ललित ने कहा था – यह लोग बगैर आंदोलन के कुछ नहीं होने देंगे
कल्पना इनामदार ने कहा कि ललित से उसकी पहली मुलाकात डेढ़ साल पूर्व यानी 19 जून 2022 को दिल्ली में बेरोजगारी व महंगाई के मुद्दे पर आयोजित होनेवाली एक बैठक में हुई थी। इसके बाद पुन: 20 अप्रैल 2023 को दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा इसकी अनुमति भी दे दी गयी थी। ठीक उसी समय, जब कार्यक्रम प्रारंभ होता, उसे निरस्त कर दिया गया। उस समय भी ललित ने कहा था कि मैडम ये लोग बगैर आंदोलन के वैसे कुछ नहीं होने देंगे। मैं उनकी मांगों का समर्थन करता हूं।
मैं ललित को न्याय दिलाने के लिए उसका हरसंभव मदद करूंगी
राष्ट्रीय लोक आंदोलन मुंबई के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि ललित और उनके साथियों ने अपनी मांग संसद की सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी कर की, यह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि आज भी देश में महंगाई व बेरोजगारी के विरुद्ध आंदोलन होना चाहिए। इसमें ललित अग्रणी भूमिका निभा रहा था। आंदोलन के लिए पैसे की आवश्यकता होती है जो उसके पास नहीं थे। वह लोग कोई अपराधी व आतंकवादी नहीं है। केंद्र सरकार उसकी सजा माफ करे। उसके साथ बैठकर बात करे। इसी तरह की बातें उन्होंने ललित के घर लगाये बैनर में भी लिखा था। उसमें केंद्र सरकार से इसे अपराधी नहीं, क्रांतिकारी मानते हुए उसके साथ बैठक कर राहत दें। उन्होंने उनकी माता-पिता को भरोसा दिलाए हुए कहा कि मैं ललित को न्याय दिलाने के लिए उसका हरसंभव मदद करूंगी। ललित पर दर्ज सभी मुकदमा मैं लडूंगी। इसके लिए आपको लिखित देना होगा। यह कहते हुए उन्होंने ललित की मां को अपनी गाड़ी पर बिठकर स्थानीय बेनीपुर व्यवहार न्यायालय लायी। अपने नाम से हलफनामा बनाते हुए सरकार द्वारा ललित पर दर्ज कराये गए सभी मुकदमा लड़ने का आश्वासन बूढ़े माता-पिता को दिया।
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